शनि ग्रह के कैदी
लेखक:-एम मुबीन
शनि ग्रह के एक अनजान भाग में भटकते हुए उन्हें आठ दिन बीत गए थे
आठ दिनों में एक भी ऐसी बात नही हुई थी जिससे आशा बनती कि वे लोग वापस धरती पर जा सकते हैं
अभी तक तो उस स्थान पर उन्हे कोई मानव या मानव सा कोई प्राणी भी दिखाई नही दिया था ज़िससे शुक्र ग्रह या शुक्र ग्रह के उस भाग में जीवन होने का कोई संकेत मिलता
अभी तक उन्हें केवल तरह तरह के प्राणी मिले थे अजीब अजीब प्रकार के प्राणी
जिनका शरीर बंदर सा है तो सिर किसी शेर का
एक बिल्ली के आकार और शरीर का प्राणी, परंतु उसका सिर हाथी का था
एक हाथी सा बडा उंचा पूरा भारी भरकम देव काया जीव दिखाई भी दिया परंतु उसका शरीर तो हाथी का ,था परंतु सिर उंट का था
अजीब अजीब प्रकार के पक्षी, चिडिया
पूरा क्षेत्र हरा भरा था ़ ज़गह जगह पानी की झीलें और झरने थे ज़िनमें बडा ही साफ और मीठा पानी होता था उस पानी से वे अपनी प्यास बुझाते थे या स्नान करते थे
भोजन के लिए अजीब अजीब प्रकार के फल और फूल थे उन्हों ने वे फल कभी नही देखे थे ,परंतु उनका स्वाद कुछ कुछ धरती के फल आम, अमरुद, सेब,इता क़े समान था
पहले दिन जब उनका अंतरिक्ष यान आकर शुक्र ग्रह के उस भाग से टकरा कर नष्ट हो गया था और वे किसी तरह सुरक्षा यान में बैठकर अपनी जान बचाने में सफल हुए थे
तो शुक्र ग्रह की धरती के उस अनजाने भाग पर उतरते ही सबसे पहले उन्हे प्यास लगी औेर समीप ही उन्हें पीने के लिए पानी मिल गया
एक दिन बीत जाने के बाद जब भूख सताने लगी तो सामने प्रश्न आ खडा हुआ पेट की आग किस तरह बुझाई जाए ?
कई बच्चाें ने एक साथ शीला मिस से प्रश्न किया था
''मिस बहुत जोर की भूख लगी है हमें कुछ खाने के लिए दीजिये अब हम से भूख सहन नही होती है ''
''कुछ देर ठहरो में कुछ प्रबंध करती हूं'' शीला मिस ने उनसे कहा और सब बच्चाें को एक स्थान पर बिठा कर हुनैन और समीर से कहा कि वे उसके पीछे आए
फिर तीनों झाडियों में पेडाें पर लदे विचित्र फलो में से अपने खाने योगय फल खोजने लगे थे
-''हुनैन ये फल देखो कैसा है''?शीला मिस ने एक फल को चख कर हुनैन की ओर बढा दिया था
''मिस बहुत स्वादिष्ट और मीठा है ''हुनैन ने फल खाते हुए उत्तर दिया
''सम्मो तुम इस फल को चखो '' कहते शीला मिस ने एक दूसरा फल निकाल कर समीर की ओर बढा दिया था
''मिस बहुत अच्छा है'' समीर ने उत्तर दिया
फिर एक दो ओर फलो को चु कर उन्हो ने ढेर सारे फल तोडे थे और वे फल लेजा कर बच्चो को दिये थे बच्चो ने मजे ले ले कर फल खाए थे और अपनी भूख मिटाई थी
उसके बाद उनके सामने कोई समस्या नही थी
चाारों ओर पीने के लिए बहुत सा पानी था और ढेर सारे स्वादिष्ट फल
भूुख लगती तो फल खाते और प्यास लगती तो पानी पीते और रास्ते की खोज में भटकते रहते
दिन भर वे भटकते रहे अपने चारों ओर आते जाते विचित्र पशु पक्षियों को देखते ज़ो उन्हे आश्चर्य से देखते थे
शायाद उनके से जीव उन्हो ने पहली बार देखे थे ऌसलिए वे बार बार उन्हें रूक रूक कर आश्चर्य से देखते और मुंह से तरह तरह की आवाजे निकालते आगे बढ जाते थे
रात होती तो किसी बडे से पेड के नीचे रुक कर सो जाते थे
शुक्र की रात का क्या कहना
रात का वातावरण इतना मन मोहक होता था कि उन्हें एक क्षण के लिए भी नींद नही आती थी उनका मन चाहता था वे रात भर जाग कर शुक्र ग्रह कि सुन्दर रात देखा करे
कयोंकि रात को आकाश में कई चाँद निकल आते थे
कोई पूर्व से निकल रहा है तो कोई पश्चिम से, कोई उत्तर से ,तो कोई दक्षिण से उनकी रंग बिरंगी रोशनी शुक्र की धरती पर पडती थी तो अजीब र्दृश्य होता था परंतु शीला मिस कहती
''बच्चों सो जाओ क़ल हमे दिन भर चलना है नींद पूरी नही हो सकेगी तो तुम चल नही पाआगे''
इसलिए विवश हो कर सो जाना पडता था
रात भर शीला मिस, हुनैन और समीर जाग कर पहरा देते थे पहले शीला मिस जागती हुनैन समीर सोते थे फ़िर शीला मिस सो जाती थी और हुनैन पहरा देता था रात के अन्तिम पहर में पहरा देने का काम समीर करता था
यह 2080 की बात थी
वे सब नवी कक्षा के बच्चे अपनी टीचर शीला मिस के साथ एक छोटे से अंतरिक्ष यान में सौर मंडल की सैर के लिए निकले थे
परंतु शूक्र ग्रह के पास पहुंचतें ही उनका अंतरिक्ष यान किसी धुमकेतू की पूंछ से टकराया अौर उसकी पूंछ की गैसो से गुजरते हुए र्रगड के कारण उनके अंतरिक्ष यान में आग लग गई
उन्हों ने तीन छोटे छोटे सुरक्षा यानाें में बैठकर अपनी जान बचाई
उनका अंतरिक्ष यान शुक्र ग्रह की धरती से टकरा कर नष्ट हो गया था परंतुू उनके छोटे छोटे सुरक्षा यानो के कारण वे किसी तरह अपनी जानें बचा कर शुक्र की धरती पर पहुंच गए थे
और आठ दिनों से शेक्र की धरती के उस अनजान भाग में भटक रहे थे
''शीला मिस धरती से हमारा संपर्क टूट चुका है अब हमारे पास संपर्क का काई साधन भी नही है जिस से धरती पर अपने घर वालों को अपने बारे में बता सकें
'हमारे साथ क्या हुआ है? हम कहां है? हमारे घर वालों को कुछ नही मालुम होगा'
'' यहां कोई भी हमारी सहायता के लिए नही आ सकता ''
''लगता है अब हमे जीवन भर इस शुक्र ग्रह पर किसी कैदी की तरह रहना पडेगा''
''हम शुक्र ग्रह के कैदी बन गए है हां हम शुक्र ग्रह के कैदी है ''
बच्चे निराशा भरी बातें करते थे शीला मिस हुनैन और समीर उन्हें सांत्वना देते थे
''हिम्मत मत हारो,निराश मत होओ धीरज से काम लो निराश होने से कोई लाभ नही धीरज से काम लोगे तो यंहा से जिसे तुम शुक्र ग्रह के कैदी कह रहे हो यहां से निकलने का कोई ना कोई रासता निकल आएगा
बच्चों को समझाते थे
परंतु इस प्रकार शुक्र ग्रहा पर भटकते उन्हें 15 दिन हो गए थे बच्चो की निराशा बढती जा रही थी शीला, हुनैन और समीर की आशा भी टूट रही थी
अचानक उन्हें एक जगा एक विचित्र सा यान दिखाई दिया'
'' अरे ये तो कोई अंतरिक्ष यान है ,'' सब ने एक साथ कहा
सब अंतरिक्ष यान में गएउन्हों ने जाकर देखा तो उन्हें भीतर कोई भी दिखाई नही दिया यान में कोई बिगाड था वह उड नही पा रहा था उसकी स्थिती बताती थी वह कई सो वर्ष पुराना है
''इस यान में कोई बीगाड पैदा हो गया था जिस के कारण ये जहां उतर गया और हम इसके द्वारा धरती पर वापस जा सकजे है ''
''जरुर जा सकते है ''शीला मिस खुशी से बोली ''अब सब कुछ हमारे परिश्रम,कठोर प्रयास, धैर्य पर निर्भर है यदी हम कठोर परिश्रम से इस अंतरिक्ष यान का बिगाड दूर करने में सफल हो गए तो इस शुक्र ग्रह की कैद से आजाद हो कर वापस धरती पर पहुंच जाएगे वरना जीवन भर हमे यहां कैदी बन कर रहना पडेगा
''हम इस यान की खराबी दूर करने का पूरा प्रयत्न करेगे -''
सब बच्चे एक स्वर में बोले और काम में लग गए हर कोई अपनी बुध्दि के अनुसार बिगाड दूर करने का पुरा प्रयत्न कर रहा था
अंत सब का प्रयत्न रंग लाया बिगाड दूर हो गया अंतरिक्ष यान उडने लगा
और वे सब उस यान में बैठ कर शुक्र ग्रह की कैद से आजाद हो कर धरती की ओर चल दिये !
-----------समाप्त--------------------
पता:-
एम मुबीन
303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती
भिवंडी-421 302
जिठाणे महारा8ट्र
मोबाईल:-09372436628
अंतरिक्ष में खोए
लेखक:-एम मुबीन
हुनैन अपने साथियों के साथ अंतरिक्ष की यात्रा पर था
2048 में छुटिटयों में स्कूल के बच्चे सैर सपाटे के लिए चाँद, मंगल ग्रह या फिर शुक्र ग्रह पर जाया करते थे
वह विशेष यान बीस दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पर था प्रक़ाश की गति से भी तेज चलने वाले उस यान को धरती छोडे चार दिन ही हुए थे परंतु वह सौर मंडल के बाहर निकल गए थे
यान में कुल बीस बच्चे थे हुनैन के साथ उसका मित्र राजू बैठा हुआ था
कुछ देर पहले राजू का मोंटी से झगडा हुआ था मोंटी उनकी ही स्कूल में पढता था परंतु वह बडा ही झागडालू , घमंडी और कपटी था ज़ो कोई यदि उस की किसी गलत बात को भी नही मानता तो वह उससे झगडा करने लगता था ऐसी ही एक गलत बात मोंटी ने कही थी जो राजू ने नहीं मानी तो उससे झगडा करने लगा
बात मार पिट तक पहुंच गई तो हुनैन और स्कूल टीचर ने बीच बचाव किया और हुनैन राजू को अपनी सीट पर ले आया
राजू को पेशाब लगी तो वह उठकर यान के पिछले भाग में गया हुनैन ने देखा था मोंटी भी उस ओर गया था फ़िर उनके बीच कोई विवाद ना हो जाए इसलिए हुनैन भी उसके पीछे चल दिया
परंतु उसके वहां पहुंचे तक विवाद हो चुका था
अचानक मोंटी ने यान की खिडकी खोल दी और वह राजू को यान से बाहर फेंकने की कोशिश करने लगा
'मोंटी यह क्या कर रहे हा?े' राजू की सहायता को हुनैन बढा
परंतु तब तक मोंटी राजू को यान की खिडकी से बाहर फेंक चुका था हुनैन को भी उसने खिडकी के बाहर ढकेल दिया
हुनैन और राजू को लगा वे निचे गिरते जा रहे है
दूसरे ही क्षण में उन्हों ने अपने विशेष अंतरिक्ष यान के वस्त्राें में लगे गैस मास्क पहन लिए
एक क्षण में ही उनका यान उनसे लाखो मील ूदूर जा चुका था
मास्क पहन कर वे कुछ संभले तो उन्हों ने स्वंय को अंतरिक्ष में पाया
अंतरिक्ष में गुरुत्व तो नही होता है वहां आदमी इस प्रकार चल फिर सकता है जिस प्रंकार धरती पर लोग सडकों पर चलते हैं
अंतरिक्ष में दूर दूर तक प्रकाश ही प्रकाश फैला हुआ था पूरे आकाश में छोटे छोटे तारे झिलमिला रहे थे वे किसी समीप के ग्रह से भी शायद करोडों मिल दूर थे
''हुनैन यह कया हो गया? हम तो अंतरिक्ष में गिर गए हैं, यहां से ना तो हम धरती पर जासकते हैं ना कोई हमारी सहायता को यहां तक आ सकता है हमरे पास एक मास की ओकसीजन खाना पीना है हम एक महीने तक यहां पर जिंदा रहेगे ,फिर तडप तडप के मर जाएगे'' राजू रूहांसे स्वर में बोला
'तुम धैर्य रखो राजू' हुनैन बोला 'हमारे पास संपर्क के लिए ट्ररान्स मिटर भी तो है हम दोनो इनसे धरती से संपर्क करने का प्रयत्न करेगे और अपनी बिपता सुनाएगे शायद कोई हमारी सहायता को आ जाए ''
'आंभव हुनैन' राजू बोला ''हमारा संदेश धरती पर पहुंच भी गया तो कोई हमारी सहायता को नही आएगा हम उन्हें बता ही नही पाएंगे कि हम अंतरिक्ष में कहां अटके हुए हैं फ़िर भला इतने बडे ब्राहमांड में हमे कोई कैसे खोज सकता हैं ?''
राजू का कहना सच था
वे केवल एक मास तक जिंदा रह सकते थे जब तक उनके पास हवा अैर भेजन हैं उसके बाद बचना मुश्किल था
जो यान अंतरिक्ष में यात्रा करते थे उनके यात्रियों को ऐसे कपडे पहना दिये जाते थे जिस में एक मास का भोजन हवा और संपर्क के लिए ट्ररान्समिटर हो ताकि यदि यान को कोई दुर्घटना हो जाए तो उसके यात्रि कम से कम एक मास तक अंतरिक्ष में जिंदा रहे और उन्हें खोज कर उनकी जान बचाई जा सके
उनके कपडों में जो ट्ररान्समिटर लगे थे वे उसी के सहारे बातें कर रहे थे वरना अंतरिक्ष में हवा तो नही होती है जरो आवाज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाए
दोनो धरती से संपर्क बनाने का प्रयत्न करने लगे परंतु उनका धरती से संपर्क नही हो पा रहा था
दो दिन तक प्रयत्न के बाद भी ना तो उनका धरती से कोई संपर्क हो सका ना ही अंतरिक्ष में यात्रा करते किसी यान से
वे निराश होकर बैठ गए
'राजू निराश होने की जरुरत नही' अब हम अंतरिक्ष में बसने वाले अन्य जिवों से संपर्क स्थापित करने की कोशीश करते हैं शायाद कोई रास्ता निकले'' क़हते हुनैन ने संपर्क स्थापित करने कोशीश की
ट्ररान्समिटर पर विचित्र बोलियों में कई संदेश आ रहे थे ट्ररान्समिटर में यह योगयता थी कि अंतरिक्षमें बोली जाने वाली सारी बोलीयों को वह मात्रृ भाषा में सुना सकता था और उनकी मात्रृ भाषाका संदेश अंतरिक्ष की सभी बोलियों में प्रसारित कर सकता था
अचानक उन्हें एक संदेश सुनाई देने लगा
'हेलो राजा के वी हम अणुशक्ति केंद्र से बोल रहें है इस केंद्र का संचालन करने हम धरती से जो आदमी लाए थे वह मर गया है इस केंद्र कां संचालन करने के सभी संदेश उसने अपने कंप्यूटर पर धरती की किसी भाषा में संग्रहित कर रखे है जिन्हें हम नही पढ पा रहे हैं और केंद्र का संचालन करना कठिन हो रहा है यदि जल्द कोई रास्ता नही निकाला तो इस केंद्र से हमारे ग्रह को जो र्उजा मिलती ह ैवह मिलनी बंद हो जाएगी और घोर संकट पैदा हो जाएगा'
'यह तो बडे संकट की बात है कोई रास्ता निकालो नहीं तो हमारा ग्रह संकट में आ जाएगा' राजा के वी का उत्तर था
'धरती पर जा कर किसी भी आदमी को लाने में महीनों लग जाएगे तब तक तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा'
'कुछ भी करो कोई रास्ता निकालों' कह कर संदेश बंद हो गया
दोनों ने उस संदेश से अनुमान लगा लिया कि वे लोग किस प्रकार के संकट में फसं हुए है
अचानक कुछ सोचते हुए दोनों चौंक पडे
'राजू में जो सोच रहा हुं कया तुम भी वही तो नहीं सोच रहे हो?' हुनैन ने पूछा
'हां हुनैन हम इन लोगों की सहायता कर सकते है कंप्यूटर में जो जानकारी संग्रहित है उस की सहायता से हम उस केंद्र का संचालन कर के उन लागों की सहायता कर सकते हैं बदले में वे हमें यहां से निकाल कर धरती पर पहुंचा सकते है ''
''तुरंत उनसे संपर्क स्थापित करने का प्रयत्न करो'' हुनैन बोला और राजू राजा के वी से संर्पक् स्थापित करने का प्रयत्न करने लगा
संपर्क स्थापित हो गया तो उन्हों ने उन्हें बता दिया कि वे किसी तरह उन की सहायता कर सकते हैं यदि वे अंतरिक्ष में उन्हें ढूंढ कर उन तक पहुंच सकते है
'आप के ट्ररान्समिटर से आने वाले संकेतो के सहारे हम आप लोगों तक पहुच जाएगे संकेत जिस गति से यहां पहुंच रहे है उसके अनुसार हमे आप लोगो तक पहुंचने में आठ दिन लगेंगे'
'तो जल्दी आइए हम आप का इंतेजार कर रहें हैं 'दोनों बोलें
सातवें दिन एक यान उनके पास पहुंचा वे दूसरी दुनिया के वासी थे वे उन्हें अपने ग्रह के अनुकेंद्र ले गए
उस केंद्र के संचालन का मार्गदर्शन कंप्यूटर में था उस जानकारी के अनुसार उन्होंने केंद्र का संचालन किया और संचालन करना सिखाया
एक मास में वे लोग उस केंद्र का संचालन करने के योगय हो गए तो कृतज्ञता जाते ढेर सारे उपहारों के साथ उन्होंने विशेष यान से वापस धरती पर भेज दिया
इस प्रकार दोनों अपनी सूझबूझ से एक एैसी जगह से भी वापस आगए जहां से वापसी असंभव थी
समाप्त
पता:-
एम मुबीन
303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती
भिवंडी-421 302
जिठाणे महारा8ट्र
मोबाईल:-09372436628
सुपर कंप्यूटर का आतंक
लेखक:-एम मुबीन
केवल दस मिनट में पूरे मुंबई शहर में जैसे एकप्रलय आ कर चली गई चारों ओर से दुर्घटनाओं के समाचार आ रहे थे
शहर के हर चौराहे पर गल्त सिगन मिलने के कारण चारों ओर से गाडियां चल पडीं थीं जिस से हजारों गाडियां एक दूसरे से टकरा गई थीं हजारों दुर्घटनाए हुई थीं सैंकडो लोग मारे गए थे, घायल हुए थे
दुर्घटनाए गलत सिगनल मिलने से सडकों पर ही नहीं हुई थी, सौ के लग भग लोकल गाडियां एक दुसरे से गलत सिगनल मिलने के कारण टकरा गई थी उन लोकल गाडियों के टकराने से बडे भयानक परिणाम सामने आए थे
उन में मरने वालों की संख्या हजारों तक पहुंच गई थी घायल भी हजारों थे रुक़ी गाडियों के चलने के संकेत मिले थे चलती गाडियों को रुकने के, इसी से गड बडी हो गई थी और यह दुर्र्घटनाए हुई थी
हवाई अडडे पर हवाई जहाजो के साथ भी यही हुआ था रुके हवाई जहाजो को उडने का आदेश मिला था उतरने वालों को रुकने का, इस का फल यह निकला कि आकाश में प्रतिक्षा करने वाले और उडने वाले कई हवाई जहाज एक दूसरे से टकरा गए थे
कुछ हवाई जहाजो को एैसे रन वे पर उतरने के संकेत मिले थे जिन पर पहले से हवाई जहाज खडे थे फल स्वरुप वे एक दूसरे से टकरा गए थे
बंदर गाह पर कोई बडी दुर्घटना नही हुई थी केवल रुके जहाज चल पडे थे और जिन जहाजो को समुंद्र में रुकना था वे गोदी से आलगे थे
2050 में मुंबई शहर की सारी याता यात को नियंत्रन करने के लिए उसे एक सुपर कंप्युटर को सोंप दिया गया था
वह सुपर कंप्यूटर सडक, रेल, हवाई और जल मार्ग की याता यात को नियमित करता था अभी तक वह सुपर कंप्यूटर बहुत अच्छी तरह काम कर रहा था कभी काई मामूली सी दुर्घटना भी नही हुई थी
परंतू अचानक पूरे दस मिनट तक वह कंप्यूटर चारों मार्गों की यातायात को गलत आंदेश और सेंकत देता रहा और यह प्रलय आई
दस मिनट बाद फिर वह नियमित काम करने लगा था इन दुर्घटनाओं का कारण क्या था यह तो तुरंत मालूम हो गया क़ि सुपर कंप्यूटर से गलती हुई थी
इस लिए कंप्यूटर के सारे विशेषज्ञ उस सुपर कंमप्यूटर की जांच में लग गए
उन में हुनैन के पिता जी डॉ अन्सारी भी थे
वह सुपर कंप्यूटर के नियंत्रक थे
सारे विशेषज्ञों ने सुपर कंप्यूटर एक्स वी 2 की अच्छी तरहा जांच की, परंतु उन्हें कहीं भी कोई खराबी दिखाई नहीं दी
कंप्यूटर नियमित काम कर रहा था
इस प्रकार खराबी तो समझ में नहीं आ सकी परंतु सब कुछ नियमित चलता रहा
परंतु दूसरे दिन फिर वही प्रलय आई
दस मिनट तक फिर कंप्यूटर ने गलत आदेश और संकेत दिये और चारों मार्गों पर फिर वही दुर्घटनाए हो गई
दस मिनट बाद कंप्यूटर फिर नियमित काम कर के सही आदेश और संकेत दे रहा था परंतु उन दुर्घटनाओं के कारण चारों ओर हाहाकार मची हुई थी और आतंक फैला हुआ था
फिर विशेषज्ञ उसकंप्यूटर की जांच में लग गए और इस बार उन्हे इस गडबडी का कारण भी समझ में आ गया
सुपर कंप्यूटर के संचालन के कार्यक्रममें कुछ घातक बदलाव के वायरस डसल दिए गए थे जिन के कारण यह तबाही आई थी
उन घातक बदलाव के वायरस ने कंप्यूटर के कुछ संकेतों को नष्ट कर दिया था जिस के कारण उस ने गलत संकेत दिए थे
आम तौर पर सुपर कंप्यूटर पर घातक बदलाव के वायरस इता क़े आक्रमण और घात से उन पर कोई प्रभाव नही होता है परंतु यह बिलकुल नए घातक बदलाव के वायरस थे अब उन को सुपर कंप्युटर से निकालना सब से बडी समस्या थी
और सारे विशेषज्ञ इस के लिए सिर पकड कर बैठे थे उन घातक बदलाव के वायरस को कंप्युटर से निकालना है तो कम से कम तीन चार दिन कंप्युटर बंद करना पडेगा
और एक क्षण के लिए भी कंप्युटर बंद करना संभव नही था क्योंकी यदि कंप्यूटर बंद हो गया तो यातायात ठब हो जाएगी
यदि उन घातक बदलाव के वायरस प्रोग्राम को नही निकाला गया तो वे फिर आतंक मचाएगे और वही दुर्घटनाए होगी प्रलय आएगी
उस दिन हुनैन के पिता डॉ अन्सारी घर आएतो बहुत चिंतित थे
' क्या बात है पिता जी आप बहुत चिंतित दिखाई द ेरहे है ?' हुनैन ने उनसे पुछा
उत्तर में उन्हों ने हुनैन को सारी कहानी सुनाई
'' अब समस्या यह है कि एक क्षण के लिए भी कंप्यूटर बंद नही कर सकतें, और बिना कंप्यूटर बंद किए घातक बदलाव के वायरस भी नही निकाल सकते यदि घातक बदलाव के वायरस नही निकले तो फिर वही कयामत आएगी हम सब तो किसी रास्ते को ढूंढने में असफल हो गए है ेबेंटा अब तुम ही कोई रास्ता ढूंढो
''ठिक है पिता जी'' कहते हुनैन सोच में डूब गया कि किसी तरहा इस समस्या का समाधान निकाला जाए ?
रात भर वह इसी बारे में सोचता रहा सवेरे अचानक एक विचार उसके मस्तिष्क में आया वह तुरंत दौड ता हुआ अपने पिता के पास गया
'पिता जी, मुझे यह बताईये जो सुपर कंप्यूटर एकस वी 2 यातायात नियंत्रण करता है हमारे पास क्या उतनी शक्ति क्षमता का कोई और सुपर कंप्यूटर है ?'
' हां है'
'हम उस कंप्यूटर में क्या यात यात का कार्यक्रम लगा सकते है ?
'हां '
''फिर तो समस्या हल हो गई आप उस दूसरे सुपर कंप्यटर में याता यात का कार्यक्रम लगा कर उसे मुख्य कंप्यूटर से जोड दे वह याता यात नियत्रण करेंगा ज़िस कंप्यूटर में घातक बदलाव के वायरस हुए है उसे बंद कर के उसके घातक बदलाव के वायरस निकाल लिजिए ''
'अरे वाह' डॉ अन्सारी उछल पडे हम ने तो यह सोचा ही नही इस प्रकार हम आसानी से इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं'
हुनैन के सुझाव अनुसार काम किया गया
नए कंप्यूटर से सारे संबध जोड दिए गए बिना कोई विघन हुए सब कुछ समान्य रुप से चलता रहा और इस प्रकार सुपर कंप्यूटर का आतंक हुनैन की सूझ बूझ के कारण खतम हो गया
समाप्त
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भिवंडी-421 302
जिठाणे महारा8ट्र
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संकट
लेखक:-एम मुबीन
2057 के एक दिन अचानक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ''भाता'' के राडरो ने संकेत दिया के अंतरिक्षसे आती कुछ उडन तश्तरियां धरती की ओर बढ रही है
सारी दुनिया के टी वी पर ''भाता'' 'के ैचेनल ने घंटी बजा कर इस बात की घोषणा की के अब यह चैनल कोई अनहोनी घटना बताने वाला है
सारी दुनिया के लाग '''भाता चैनल' लगा कर दिल थाम कर बैठ गए उस समय संचार माध्यामों ने इतनी प्रगति कर ली थी कि हर संस्था
कंपनी, इता ने अपना टी वी चैनल आरंभ कर दिया था जो आसानी से सारी दुनिया में देखा जाता था यदि कोई महत्वपूर्ण सुचना उस चैनल को देनी होती थी तो वह पहले इस बात का संकेत देकर लोगों को सर्तक कर देता था ताकि वे उस विशेष कार्यक्रम को देख सके
टी वी की स्क्रीन पर दो तीन बडी बडी उडन तश्तरियों के चित्र उभरे फिर उन अंतरिक्ष यानों के भीतर बैठे विचित्र वासियों के चेहरे उभरे जो सारी दुनिया को संबोधित कर रहे थे
'हम दूसरे ग्रह से आए हुए हैं वह ग्रह इतनी दूर है कि तुम लोग अपनी तेज रफतार अंतरिक्ष यान से भी दो चार हजार वार्षों तक वहां नही पहुंच सकते स्वय हमारे यानो को धरती तक पहुंचनं के लिए दो वर्ष लगते है तुम्हारी धरती पर पानी नामक एक द्रव्य मौजूद है जो हमारे लिए कीमती है हमारे ग्रह पर मिलने वाले कुछ पध्दार्र्थो को मिला कर हम उससे इतना शक्ति शाली बम बनाना चहते है कि उस बम के केवल एक कण से तुम्हारी धरती नष्ट हो जाए उसे बनाने के लिए हमे धरती पर मौजूद पानी में से 1ध्3 पानी चाहिए इस लिए हमे इतना पानी ले जाने दिया जाए यदि हमे पानी ले जाने से रोका गया तो हमारे पास ऐसे शस्त्र है जिन से हम सारी धरती नष्ट कर देंगे नमूने के तौर पर हम धरती के एक द्वीप को नष्ट कर रहे हैं ''
उसके बाद उस यान से एक किरण निकली और फिर टी वी पर एक द्वीप के नष्ट होने के दृश्य उभरे
यदि उस द्वीप को नष्ट करना होता तो उस समय उपलब्ध सबसे अधिक विनाशकारी दस बम दरकार थे परंतु केवल एक साधारण किरन ने उस द्वीप को नष्ट कर दिया था उस दृशय को देख कर सारी दुनिया के लोग भयभीत हो उठे
'हमे धमकाने की कोशिश मत करो ' भाता द्वारा उन लोगो को ललकारा गया' हम भी इतने शक्ति शाली हैं कि एक क्षण मे ंतुम लोगो को नष्ट कर सकते हैं नमूना पेश है ''
एक किरन आकाश की ओर बढी और उनका एकअंतरिक्ष यान नष्ट हो गया
'तुम लोग हमारे सारे यानों को नष्ट भी कर दो तो हमारा मिश्न खत्म नही होगा हमारी धरती से और यान आएगे परंतु वे धरती का 1ध्3 पानी लेजाकर ही रहेंगे चाहे इसके लिए धरती को नष्ट क्यों ना करना पडे''
''परंतु तुम इतना सारा पानी अपने इतने छोटे यान से कैसे लेजा सकते हो? ''भाता द्वारा पूछा गया
'जिस प्रकार तुम्हारी धरती पर पानी को जमा कर बर्फ बनाई जाती है उसी तरहा हम उस पानी को ठोस बनाकर ले जाएंगे हमारी धरती पर एक गेस मिलती है वह पानी में मिलाकर करोडो अरबो लिटर पानी को भी हजार दो हजार किलो का ठोस पध्दार्थ बना देती है हम उसकी सहायता से सारे पानी को ठोस बना कर ले जाएंगे नमुने के लिए हम उस गेस की सहायता से प्रशांत महा सागर के एक भाग को ठोस पध्दर्थ बना रहे है ''
पता नही उन्हो ने क्या चीज धरती की ओर फेंकी लोगों ने देखा प्रशांत महा सागर सूख रहा है और देखते ही देखते सारा प्रशांत महा सागर सूख गया और वहा केवल एक छोटा सा बर्फ के समान पहाड उभर आया
'देखा हम ने प्रशांत महा सागर को एक छोटा सा बर्फ का पहाड बना दिया अ