Make your own free website on Tripod.com

शनि ग्रह के कैदी

लेखक:-एम मुबीन

शनि ग्रह के एक अनजान भाग में भटकते हुए उन्हें आठ दिन बीत गए थे

आठ दिनों में एक भी ऐसी बात नही हुई थी जिससे आशा बनती कि वे लोग वापस धरती पर जा सकते हैं

अभी तक तो उस स्थान पर उन्हे कोई मानव या मानव सा कोई प्राणी भी  दिखाई नही दिया था ज़िससे शुक्र ग्रह या शुक्र ग्रह के उस भाग में जीवन होने का कोई संकेत मिलता

अभी तक उन्हें केवल तरह तरह के प्राणी मिले थे अजीब अजीब प्रकार के प्राणी

जिनका शरीर बंदर सा है तो सिर किसी शेर का

एक बिल्ली के आकार और शरीर का प्राणी, परंतु उसका सिर हाथी का था

एक हाथी सा बडा उंचा पूरा भारी भरकम देव काया  जीव दिखाई भी दिया परंतु उसका शरीर तो हाथी का ,था परंतु सिर उंट का था

अजीब अजीब प्रकार के पक्षी, चिडिया

पूरा क्षेत्र हरा भरा था ़ ज़गह जगह पानी की झीलें और झरने थे ज़िनमें बडा ही साफ और मीठा पानी होता था उस पानी से वे अपनी प्यास बुझाते थे या स्नान करते थे

भोजन के लिए अजीब अजीब प्रकार के फल और फूल थे उन्हों ने वे फल कभी नही देखे थे ,परंतु उनका स्वाद कुछ कुछ धरती के फल आम, अमरुद, सेब,इता क़े समान था

पहले दिन जब उनका अंतरिक्ष यान आकर शुक्र ग्रह के उस भाग से टकरा कर नष्ट हो गया था और वे किसी तरह सुरक्षा यान में बैठकर अपनी जान बचाने में सफल हुए थे

 तो शुक्र ग्रह की धरती के उस अनजाने भाग पर उतरते ही सबसे पहले उन्हे प्यास लगी औेर समीप ही उन्हें पीने के लिए पानी मिल गया

 एक दिन बीत जाने के बाद जब भूख सताने लगी तो सामने प्रश्न आ खडा हुआ पेट की आग किस तरह बुझाई जाए ?

कई बच्चाें ने एक साथ शीला मिस से प्रश्न किया था

''मिस बहुत जोर की भूख लगी है हमें कुछ खाने के लिए दीजिये अब हम से भूख सहन नही होती है ''

''कुछ देर ठहरो में कुछ प्रबंध करती हूं'' शीला मिस ने उनसे कहा और सब बच्चाें को एक स्थान पर बिठा कर हुनैन और समीर से कहा कि वे उसके पीछे आए

फिर तीनों झाडियों में पेडाें पर लदे विचित्र फलो में से अपने खाने योगय फल खोजने लगे थे

-''हुनैन ये फल देखो कैसा है''?शीला मिस ने एक फल को चख कर हुनैन की ओर बढा दिया था

''मिस बहुत स्वादिष्ट और मीठा है ''हुनैन ने फल खाते हुए उत्तर दिया

''सम्मो तुम इस फल को चखो '' कहते शीला मिस ने एक दूसरा फल निकाल कर समीर की ओर बढा दिया था

''मिस बहुत अच्छा है'' समीर ने उत्तर दिया

फिर एक दो ओर फलो को चु कर उन्हो ने ढेर सारे फल तोडे थे और वे फल लेजा कर बच्चो को दिये थे बच्चो ने मजे ले ले कर फल खाए थे और अपनी भूख मिटाई थी

उसके बाद उनके सामने कोई समस्या नही थी

चाारों ओर पीने के लिए बहुत सा पानी था और ढेर सारे स्वादिष्ट फल

भूुख लगती तो फल खाते और प्यास लगती तो पानी पीते और रास्ते की खोज में भटकते रहते

 दिन भर वे भटकते रहे अपने चारों ओर आते जाते विचित्र पशु पक्षियों को देखते ज़ो उन्हे आश्चर्य से देखते थे

शायाद उनके से जीव उन्हो ने पहली बार देखे थे ऌसलिए वे बार बार उन्हें रूक रूक कर आश्चर्य से देखते और मुंह से तरह तरह की आवाजे निकालते आगे बढ जाते थे

रात होती तो किसी बडे से पेड के नीचे रुक कर सो जाते थे

शुक्र की रात का क्या कहना

रात का वातावरण इतना मन मोहक होता था कि उन्हें एक क्षण के लिए भी नींद नही आती थी उनका मन चाहता था वे रात भर जाग कर शुक्र ग्रह कि सुन्दर रात देखा करे

कयोंकि  रात को आकाश में कई चाँद निकल आते थे

कोई पूर्व से निकल रहा है तो कोई पश्चिम से, कोई उत्तर से ,तो कोई दक्षिण से उनकी रंग बिरंगी रोशनी शुक्र की धरती पर पडती थी तो अजीब र्दृश्य होता था परंतु शीला मिस कहती

''बच्चों सो जाओ  क़ल हमे दिन भर चलना है नींद पूरी नही हो सकेगी तो तुम चल नही पाआगे''

इसलिए विवश हो कर सो जाना पडता था

रात भर शीला मिस, हुनैन और समीर जाग कर पहरा देते थे पहले शीला मिस जागती हुनैन समीर सोते थे फ़िर शीला मिस सो जाती थी और हुनैन पहरा देता था रात के अन्तिम पहर में पहरा देने का काम समीर करता था

यह 2080 की बात थी

वे सब नवी कक्षा के बच्चे अपनी टीचर शीला मिस के साथ एक छोटे से अंतरिक्ष यान में सौर मंडल की सैर के लिए निकले थे

परंतु शूक्र ग्रह के पास पहुंचतें ही उनका अंतरिक्ष यान किसी धुमकेतू की पूंछ से टकराया अौर उसकी पूंछ की गैसो से गुजरते हुए र्रगड के कारण उनके अंतरिक्ष यान में आग लग गई

उन्हों ने तीन छोटे छोटे सुरक्षा यानाें में बैठकर अपनी जान बचाई

उनका अंतरिक्ष यान शुक्र ग्रह की धरती से टकरा कर नष्ट हो गया था परंतुू उनके छोटे छोटे सुरक्षा यानो के कारण वे किसी तरह अपनी जानें बचा कर शुक्र की धरती पर पहुंच गए थे

और आठ दिनों से शेक्र की धरती के उस अनजान भाग में भटक रहे थे

''शीला मिस धरती से हमारा संपर्क टूट चुका है अब हमारे पास संपर्क का काई साधन भी नही है जिस से धरती पर अपने घर वालों को अपने बारे में बता सकें

'हमारे साथ क्या हुआ है? हम कहां है? हमारे घर वालों को कुछ नही मालुम होगा'

'' यहां कोई भी हमारी सहायता के लिए नही आ सकता ''

''लगता है अब हमे जीवन भर इस शुक्र ग्रह पर किसी कैदी की तरह रहना पडेगा''

 ''हम शुक्र ग्रह के कैदी बन गए है हां हम शुक्र ग्रह के कैदी है ''

बच्चे निराशा भरी बातें करते थे शीला मिस हुनैन और समीर उन्हें सांत्वना देते थे

''हिम्मत मत हारो,निराश मत होओ धीरज से काम लो निराश होने से कोई लाभ नही धीरज से काम लोगे तो यंहा से जिसे तुम शुक्र ग्रह के कैदी कह रहे हो यहां से निकलने का कोई ना कोई रासता निकल आएगा

बच्चों को समझाते थे

परंतु इस प्रकार शुक्र ग्रहा पर भटकते उन्हें 15 दिन हो गए थे बच्चो की निराशा बढती जा रही थी शीला, हुनैन और समीर की आशा भी टूट रही थी

अचानक उन्हें एक जगा एक विचित्र सा यान दिखाई दिया'

'' अरे ये तो कोई अंतरिक्ष यान है ,'' सब ने एक साथ कहा

 सब अंतरिक्ष यान में गएउन्हों ने जाकर देखा तो उन्हें भीतर कोई भी दिखाई नही दिया यान में कोई बिगाड था वह उड नही पा रहा था उसकी स्थिती बताती थी वह कई सो वर्ष पुराना है

''इस यान में कोई बीगाड पैदा हो गया था जिस के कारण ये जहां उतर गया और हम इसके द्वारा धरती पर वापस जा सकजे है ''

''जरुर जा सकते है ''शीला मिस खुशी से बोली ''अब सब कुछ हमारे परिश्रम,कठोर प्रयास, धैर्य पर निर्भर है यदी हम कठोर परिश्रम से इस अंतरिक्ष यान का बिगाड दूर करने में सफल हो गए तो इस शुक्र ग्रह की कैद से आजाद हो कर वापस धरती पर पहुंच जाएगे वरना जीवन भर हमे यहां कैदी बन कर रहना पडेगा

''हम इस यान की खराबी दूर करने का पूरा प्रयत्न करेगे -''

सब बच्चे एक स्वर में बोले और काम में लग गए हर कोई अपनी बुध्दि के अनुसार बिगाड दूर करने का पुरा प्रयत्न कर रहा था

अंत सब का प्रयत्न रंग लाया बिगाड दूर हो गया अंतरिक्ष यान उडने लगा

और वे सब उस यान में बैठ कर शुक्र ग्रह की कैद से आजाद हो कर धरती की ओर चल दिये !

 

-----------समाप्त--------------------

 

पता:-

एम मुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

अंतरिक्ष में खोए

लेखक:-एम मुबीन

 

हुनैन अपने साथियों के साथ अंतरिक्ष की यात्रा पर था

 2048 में छुटिटयों में स्कूल के बच्चे सैर सपाटे के लिए चाँद, मंगल ग्रह या फिर शुक्र ग्रह पर जाया करते थे

वह विशेष यान बीस दिनों की अंतरिक्ष यात्रा पर था प्रक़ाश की गति से भी तेज चलने वाले उस यान को धरती छोडे चार दिन ही हुए थे परंतु वह सौर मंडल के बाहर निकल गए थे

यान में कुल बीस बच्चे थे हुनैन के साथ उसका मित्र राजू बैठा हुआ था

कुछ देर पहले राजू का मोंटी से झगडा हुआ था मोंटी उनकी ही स्कूल में पढता था परंतु वह बडा ही झागडालू , घमंडी और कपटी था  ज़ो कोई यदि उस की किसी गलत बात को भी नही मानता तो वह उससे झगडा करने लगता था ऐसी ही एक गलत बात मोंटी ने कही थी जो राजू ने नहीं मानी तो उससे झगडा करने लगा

 बात मार पिट तक पहुंच गई तो हुनैन और स्कूल टीचर ने बीच बचाव किया और हुनैन राजू को अपनी सीट पर ले आया

राजू को पेशाब लगी तो वह उठकर यान के पिछले भाग में गया हुनैन ने देखा था मोंटी भी उस ओर गया था फ़िर उनके बीच कोई विवाद ना हो जाए इसलिए हुनैन भी उसके पीछे चल दिया

परंतु उसके वहां पहुंचे तक विवाद हो चुका था

अचानक मोंटी ने यान की खिडकी खोल दी और वह राजू को यान से बाहर फेंकने की कोशिश करने लगा

'मोंटी यह क्या कर रहे हा?े' राजू की सहायता को हुनैन बढा

परंतु तब तक मोंटी राजू को यान की खिडकी से बाहर फेंक चुका था हुनैन को भी उसने खिडकी के बाहर ढकेल दिया

हुनैन और राजू को लगा वे निचे गिरते जा रहे है

दूसरे ही क्षण में उन्हों ने अपने विशेष अंतरिक्ष यान के वस्त्राें में लगे गैस मास्क पहन लिए

एक क्षण में ही उनका यान उनसे लाखो मील ूदूर जा चुका था

मास्क पहन कर वे कुछ संभले तो उन्हों ने स्वंय को अंतरिक्ष में पाया

अंतरिक्ष में गुरुत्व तो नही होता है वहां आदमी इस प्रकार चल फिर सकता है जिस प्रंकार धरती पर लोग सडकों पर चलते हैं

अंतरिक्ष में दूर दूर तक प्रकाश ही प्रकाश फैला हुआ था पूरे आकाश में छोटे छोटे तारे झिलमिला रहे थे वे किसी समीप के ग्रह से भी शायद करोडों मिल दूर  थे

''हुनैन यह कया हो गया? हम तो अंतरिक्ष में गिर गए हैं, यहां से ना तो हम धरती पर जासकते हैं  ना कोई हमारी सहायता को यहां तक आ सकता है हमरे पास एक मास की ओकसीजन खाना पीना है हम एक महीने तक यहां पर जिंदा रहेगे ,फिर तडप तडप के मर जाएगे''  राजू रूहांसे  स्वर में बोला

'तुम धैर्य रखो राजू' हुनैन बोला 'हमारे पास संपर्क के लिए ट्ररान्स मिटर भी तो है हम दोनो  इनसे  धरती से संपर्क करने का प्रयत्न करेगे और अपनी बिपता सुनाएगे शायद कोई हमारी सहायता को आ जाए ''

'आंभव हुनैन' राजू बोला ''हमारा संदेश धरती पर पहुंच भी गया तो कोई हमारी सहायता को नही आएगा हम उन्हें बता ही नही पाएंगे कि हम अंतरिक्ष में कहां अटके हुए हैं फ़िर भला इतने बडे ब्राहमांड में हमे कोई कैसे खोज सकता हैं ?''

राजू का कहना सच था

वे केवल एक मास तक जिंदा रह सकते थे जब तक उनके पास हवा अैर भेजन हैं उसके बाद बचना मुश्किल था

जो यान अंतरिक्ष में यात्रा करते थे उनके यात्रियों को ऐसे कपडे पहना दिये जाते थे जिस में एक मास का भोजन हवा और संपर्क के लिए ट्ररान्समिटर हो ताकि यदि यान को कोई दुर्घटना हो जाए तो उसके यात्रि कम से कम एक मास तक अंतरिक्ष में जिंदा रहे और उन्हें खोज कर उनकी जान बचाई जा सके

उनके कपडों में जो ट्ररान्समिटर लगे थे वे उसी के सहारे बातें कर रहे थे वरना अंतरिक्ष में हवा तो नही होती है जरो आवाज को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाए

दोनो धरती से संपर्क बनाने का प्रयत्न करने लगे परंतु उनका धरती से संपर्क नही हो पा रहा था

दो दिन तक प्रयत्न के बाद भी ना तो उनका धरती से कोई संपर्क हो सका ना ही अंतरिक्ष में यात्रा करते किसी यान से

वे निराश होकर बैठ गए

'राजू निराश होने की जरुरत नही' अब हम अंतरिक्ष में बसने वाले अन्य जिवों से संपर्क स्थापित करने की कोशीश करते हैं शायाद कोई रास्ता निकले'' क़हते हुनैन ने संपर्क स्थापित करने कोशीश की

ट्ररान्समिटर पर विचित्र बोलियों में कई संदेश आ रहे थे ट्ररान्समिटर में यह योगयता थी कि अंतरिक्षमें बोली जाने वाली सारी बोलीयों को वह मात्रृ भाषा में सुना सकता था और उनकी मात्रृ भाषाका संदेश अंतरिक्ष की सभी बोलियों में प्रसारित कर सकता था

अचानक उन्हें एक संदेश सुनाई देने लगा

'हेलो राजा के वी हम अणुशक्ति केंद्र से बोल रहें है इस केंद्र का संचालन करने हम धरती से जो आदमी लाए थे वह मर गया है इस केंद्र कां संचालन करने के सभी संदेश उसने अपने कंप्यूटर पर धरती की किसी भाषा में संग्रहित कर रखे है जिन्हें हम नही पढ पा रहे हैं और केंद्र का संचालन करना  कठिन हो रहा है यदि जल्द कोई रास्ता नही निकाला तो इस केंद्र से हमारे ग्रह को जो र्उजा मिलती ह ैवह  मिलनी बंद हो जाएगी और घोर संकट पैदा हो जाएगा'

'यह तो बडे संकट की बात है कोई रास्ता निकालो नहीं तो हमारा ग्रह संकट में आ जाएगा' राजा के वी का उत्तर था

'धरती पर जा कर किसी भी आदमी को लाने में महीनों लग जाएगे तब तक तो सब कुछ नष्ट हो जाएगा'

'कुछ भी करो कोई रास्ता निकालों' कह कर संदेश बंद हो गया

दोनों ने उस संदेश से अनुमान लगा लिया कि वे लोग किस प्रकार के संकट में फसं हुए है 

अचानक कुछ सोचते हुए दोनों चौंक पडे

'राजू में जो सोच रहा हुं कया तुम भी वही तो नहीं सोच रहे हो?' हुनैन ने पूछा

'हां हुनैन हम इन लोगों की सहायता कर सकते है कंप्यूटर में जो जानकारी संग्रहित है उस की सहायता से हम उस केंद्र का संचालन कर के उन लागों की सहायता कर सकते हैं बदले में वे हमें यहां से निकाल कर धरती पर पहुंचा सकते है ''

''तुरंत उनसे संपर्क स्थापित करने का प्रयत्न करो'' हुनैन बोला और राजू राजा के वी से संर्पक् स्थापित करने का प्रयत्न करने लगा

संपर्क स्थापित हो गया तो उन्हों ने उन्हें बता दिया कि वे किसी तरह उन की सहायता कर सकते हैं यदि वे अंतरिक्ष में उन्हें ढूंढ कर उन तक पहुंच सकते है

'आप के ट्ररान्समिटर से आने वाले संकेतो के सहारे हम आप लोगों तक पहुच जाएगे संकेत जिस गति से यहां पहुंच रहे है उसके अनुसार हमे आप लोगो तक पहुंचने में आठ दिन लगेंगे'

'तो जल्दी आइए हम आप का इंतेजार कर रहें हैं 'दोनों बोलें

 सातवें दिन एक यान उनके पास पहुंचा वे दूसरी दुनिया के वासी थे वे उन्हें अपने ग्रह के अनुकेंद्र ले गए

उस केंद्र के संचालन का मार्गदर्शन कंप्यूटर में था उस जानकारी के अनुसार उन्होंने केंद्र का संचालन किया और संचालन करना सिखाया

एक मास में वे लोग उस केंद्र का संचालन करने के योगय हो गए तो कृतज्ञता  जाते ढेर सारे उपहारों के साथ उन्होंने विशेष यान से वापस धरती पर भेज दिया

इस प्रकार दोनों अपनी सूझबूझ से एक एैसी जगह से भी वापस आगए जहां से वापसी असंभव थी

समाप्त

 

पता:-

एम मुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

 

 

 

सुपर कंप्यूटर का आतंक

लेखक:-एम मुबीन

 

केवल दस मिनट में पूरे मुंबई शहर में जैसे एकप्रलय आ कर चली गई चारों ओर से दुर्घटनाओं के समाचार आ रहे थे

शहर के हर चौराहे पर गल्त सिगन मिलने के कारण चारों ओर से गाडियां चल पडीं थीं जिस से हजारों गाडियां एक दूसरे से टकरा गई थीं हजारों दुर्घटनाए हुई थीं सैंकडो लोग मारे गए थे, घायल हुए थे

दुर्घटनाए गलत सिगनल मिलने से सडकों पर ही नहीं हुई थी, सौ के लग भग लोकल गाडियां एक दुसरे से गलत सिगनल मिलने के कारण टकरा गई थी उन लोकल गाडियों के टकराने से बडे भयानक परिणाम सामने आए थे

उन में मरने वालों की संख्या हजारों तक पहुंच गई थी घायल भी हजारों थे रुक़ी गाडियों के चलने के संकेत मिले थे चलती गाडियों को रुकने के, इसी से गड बडी हो गई थी और यह दुर्र्घटनाए हुई थी

हवाई अडडे पर हवाई जहाजो के साथ भी यही हुआ था रुके हवाई जहाजो को उडने का आदेश मिला था उतरने वालों को रुकने का, इस का फल यह निकला कि आकाश में प्रतिक्षा करने वाले और उडने वाले कई हवाई जहाज एक दूसरे से टकरा गए थे

कुछ हवाई जहाजो को एैसे रन वे पर उतरने के संकेत मिले थे जिन पर पहले से हवाई जहाज खडे थे फल स्वरुप वे एक दूसरे से टकरा गए थे

बंदर गाह पर कोई बडी दुर्घटना नही हुई थी केवल रुके जहाज चल पडे थे और जिन जहाजो को समुंद्र में रुकना था वे गोदी  से आलगे थे

2050 में मुंबई शहर की सारी याता यात को नियंत्रन करने के लिए उसे एक सुपर कंप्युटर को सोंप दिया गया था

वह सुपर कंप्यूटर सडक, रेल, हवाई और जल मार्ग की याता यात को नियमित करता था  अभी तक वह सुपर कंप्यूटर बहुत अच्छी तरह काम कर रहा था कभी काई मामूली सी दुर्घटना भी नही हुई थी

परंतू अचानक पूरे दस मिनट तक वह कंप्यूटर चारों मार्गों की यातायात को गलत आंदेश और सेंकत देता रहा और यह प्रलय आई

दस मिनट बाद फिर वह नियमित काम करने लगा था इन दुर्घटनाओं का कारण क्या था यह तो तुरंत मालूम हो गया क़ि सुपर कंप्यूटर से गलती हुई थी

इस लिए कंप्यूटर के सारे विशेषज्ञ उस सुपर कंमप्यूटर की जांच में लग गए

उन में हुनैन के पिता जी डॉ अन्सारी भी थे

वह सुपर कंप्यूटर के नियंत्रक थे

सारे विशेषज्ञों ने सुपर कंप्यूटर एक्स वी 2 की अच्छी तरहा जांच की, परंतु उन्हें कहीं भी कोई खराबी दिखाई नहीं दी

कंप्यूटर नियमित काम कर रहा था

इस प्रकार खराबी तो समझ में नहीं आ सकी परंतु सब कुछ नियमित चलता रहा

परंतु दूसरे दिन फिर वही प्रलय आई

दस मिनट तक फिर कंप्यूटर ने गलत आदेश और संकेत दिये और चारों मार्गों पर फिर वही दुर्घटनाए हो गई

दस मिनट बाद कंप्यूटर फिर नियमित काम कर के सही आदेश और संकेत दे रहा था परंतु उन दुर्घटनाओं के कारण चारों ओर हाहाकार मची हुई थी और आतंक फैला हुआ था

फिर विशेषज्ञ उसकंप्यूटर की जांच में लग गए और इस बार उन्हे इस गडबडी का कारण भी समझ में आ गया

सुपर कंप्यूटर के संचालन के कार्यक्रममें कुछ घातक बदलाव के वायरस डसल दिए गए थे जिन के कारण यह तबाही आई थी

उन  घातक बदलाव के वायरस ने कंप्यूटर के कुछ संकेतों को नष्ट कर दिया था जिस के कारण उस ने गलत संकेत दिए थे

आम तौर पर सुपर कंप्यूटर पर घातक बदलाव के वायरस इता क़े आक्रमण और घात से उन पर कोई प्रभाव नही होता है परंतु यह बिलकुल नए घातक बदलाव के वायरस थे अब उन को सुपर कंप्युटर से निकालना सब से बडी समस्या थी 

और सारे विशेषज्ञ इस के लिए सिर पकड कर बैठे थे उन घातक बदलाव के वायरस को कंप्युटर से निकालना है तो कम से कम  तीन चार दिन कंप्युटर बंद करना पडेगा

और एक क्षण के लिए भी कंप्युटर बंद करना संभव नही था क्योंकी यदि कंप्यूटर बंद हो गया तो यातायात ठब हो जाएगी

यदि उन  घातक बदलाव के वायरस प्रोग्राम को नही निकाला गया तो वे फिर आतंक मचाएगे और वही दुर्घटनाए होगी प्रलय आएगी

उस दिन हुनैन के पिता डॉ अन्सारी घर आएतो बहुत चिंतित थे

' क्या बात है पिता जी आप बहुत चिंतित दिखाई द ेरहे है ?' हुनैन ने उनसे पुछा

उत्तर में उन्हों ने हुनैन को सारी कहानी सुनाई

'' अब समस्या यह है कि एक क्षण के लिए भी कंप्यूटर बंद नही कर सकतें, और बिना कंप्यूटर बंद किए घातक बदलाव के वायरस भी नही निकाल सकते यदि घातक बदलाव के वायरस नही निकले तो फिर वही कयामत आएगी  हम सब तो किसी रास्ते को ढूंढने में असफल हो गए है ेबेंटा अब तुम ही कोई रास्ता ढूंढो

''ठिक है पिता जी'' कहते हुनैन सोच में डूब गया कि किसी तरहा इस समस्या का समाधान निकाला जाए ?

रात भर वह इसी बारे में सोचता रहा सवेरे अचानक एक विचार उसके मस्तिष्क में आया वह तुरंत दौड ता हुआ अपने पिता के पास गया

'पिता जी, मुझे यह बताईये जो सुपर कंप्यूटर एकस वी 2 यातायात नियंत्रण करता है हमारे पास क्या उतनी शक्ति क्षमता  का कोई और सुपर कंप्यूटर है ?'

' हां है'

'हम उस कंप्यूटर में क्या यात यात का कार्यक्रम लगा सकते है ?

'हां '

''फिर तो समस्या हल हो गई आप उस दूसरे सुपर कंप्यटर में याता यात का कार्यक्रम लगा कर उसे मुख्य कंप्यूटर से जोड दे वह याता यात नियत्रण करेंगा ज़िस कंप्यूटर में घातक बदलाव के  वायरस हुए है उसे बंद कर के उसके घातक बदलाव के वायरस निकाल लिजिए ''

'अरे वाह' डॉ अन्सारी उछल पडे हम ने तो यह सोचा ही नही इस प्रकार हम आसानी से इस समस्या का समाधान निकाल सकते हैं'

हुनैन के सुझाव अनुसार काम किया गया

नए कंप्यूटर से सारे संबध जोड दिए गए बिना कोई विघन हुए सब कुछ समान्य रुप से चलता रहा और इस प्रकार सुपर कंप्यूटर का आतंक हुनैन की सूझ बूझ के कारण खतम हो गया

समाप्त

 

पता:-

एम मुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

संकट

लेखक:-एम मुबीन

 

2057 के एक दिन अचानक भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र ''भाता'' के राडरो ने संकेत दिया के अंतरिक्षसे आती कुछ उडन तश्तरियां धरती की ओर बढ रही है

सारी दुनिया के टी वी पर ''भाता'' 'के ैचेनल ने घंटी बजा कर इस बात की घोषणा की के अब यह चैनल कोई अनहोनी घटना बताने वाला है

सारी दुनिया के लाग '''भाता चैनल' लगा कर दिल थाम कर बैठ गए उस समय संचार माध्यामों ने इतनी प्रगति कर ली थी कि हर संस्था

कंपनी, इता ने अपना टी वी चैनल आरंभ कर दिया था जो आसानी से सारी दुनिया में देखा जाता था यदि कोई महत्वपूर्ण सुचना उस चैनल को देनी होती थी तो वह पहले इस बात का संकेत देकर लोगों को सर्तक कर देता था ताकि वे उस विशेष कार्यक्रम को देख सके

टी वी की स्क्रीन पर दो तीन बडी बडी उडन तश्तरियों के चित्र उभरे फिर उन अंतरिक्ष यानों के भीतर बैठे विचित्र वासियों के चेहरे उभरे जो सारी दुनिया को संबोधित कर रहे थे

'हम दूसरे ग्रह से आए हुए हैं वह ग्रह इतनी दूर है कि तुम लोग अपनी तेज रफतार अंतरिक्ष यान से भी दो चार हजार वार्षों तक वहां नही पहुंच सकते स्वय  हमारे यानो को धरती तक पहुंचनं के लिए दो वर्ष लगते है तुम्हारी धरती पर पानी नामक एक द्रव्य मौजूद है जो हमारे लिए कीमती है हमारे ग्रह पर मिलने वाले कुछ पध्दार्र्थो को मिला कर हम उससे इतना शक्ति शाली बम बनाना चहते है कि उस बम के केवल एक कण से तुम्हारी धरती नष्ट हो जाए उसे बनाने के लिए हमे धरती पर मौजूद पानी में से 1ध्3 पानी चाहिए इस लिए हमे इतना पानी ले जाने दिया जाए यदि हमे पानी ले जाने से रोका गया तो हमारे पास ऐसे शस्त्र है जिन से हम सारी धरती नष्ट कर देंगे नमूने के तौर पर हम धरती के एक द्वीप को नष्ट कर रहे हैं ''

उसके बाद उस यान से एक किरण निकली और फिर टी वी पर एक द्वीप के नष्ट होने के दृश्य उभरे

यदि उस द्वीप को नष्ट करना होता तो उस समय उपलब्ध सबसे अधिक विनाशकारी दस बम दरकार थे परंतु केवल एक साधारण किरन ने उस द्वीप को नष्ट कर दिया था  उस दृशय को देख कर सारी दुनिया के लोग भयभीत हो उठे

'हमे धमकाने की कोशिश मत करो ' भाता द्वारा उन लोगो को ललकारा गया' हम भी इतने शक्ति शाली हैं कि एक क्षण मे ंतुम लोगो को नष्ट कर सकते हैं नमूना पेश है ''

एक किरन आकाश की ओर बढी और उनका एकअंतरिक्ष यान नष्ट हो गया

'तुम लोग हमारे सारे यानों को नष्ट भी कर दो तो हमारा मिश्न खत्म नही होगा हमारी धरती से और यान आएगे परंतु वे धरती का 1ध्3 पानी लेजाकर ही रहेंगे चाहे इसके लिए धरती को नष्ट क्यों ना करना पडे''

''परंतु तुम इतना सारा पानी अपने इतने छोटे यान से कैसे लेजा सकते हो? ''भाता द्वारा पूछा गया

'जिस प्रकार तुम्हारी धरती पर पानी को जमा कर बर्फ बनाई जाती है उसी तरहा हम उस पानी को ठोस बनाकर ले जाएंगे हमारी धरती पर एक गेस मिलती है वह पानी में मिलाकर करोडो अरबो लिटर पानी को भी हजार दो हजार किलो का ठोस पध्दार्थ बना देती है हम उसकी सहायता से  सारे पानी को ठोस बना कर ले जाएंगे नमुने के लिए हम उस गेस की सहायता से प्रशांत महा सागर के एक भाग को ठोस पध्दर्थ बना रहे है ''

पता नही उन्हो ने क्या चीज धरती की ओर फेंकी लोगों ने देखा प्रशांत महा सागर सूख रहा है और देखते ही देखते सारा प्रशांत महा सागर सूख गया और वहा केवल एक छोटा सा बर्फ के समान पहाड उभर आया

'देखा हम ने प्रशांत महा सागर को एक छोटा सा बर्फ का पहाड बना दिया अब हम उस पहाड को आसानी से अपने ग्रह लेजा सकते है ऌसी प्रकार हम दुनिया का 1ध्3 पानी ले जाएगे ऌस काम के लिए हम दस दिन का समय देते है दस दिन के भीतर हमे अपनी इच्छा से धरती का 1ध्3 पानी ले जाने की अनुमती दे दी जाए वरना हम धरती को नष्ट कर के अपने तरीके से पानी ले जाएगे हम प्रशांत महा सागर को दोबारा अपने असली हालत में ला रहे है ''

पहाड पिघलने लगा और चारों ओर पानी फैलने लगा देखते ही देखते प्रशांत महासागर फिर अपनी पुरानी असली हालत पर वापस आगया

इसके साथ ही उन लोगों का भाता और सारी दुनिया से संपर्क टूट गया

इस नए संकट से सारी दुनिया दहल उठी उन्हों ने अपनी जिस शक्ति का प्रदर्शन किया था  उस से तो ऐसा लग रहा था कि वे हर हाल में दुनिया का 1ध्3 पानी लेकर ही जाएंगे वे उसके लिए दुनिया को नष्ट भी कर सकते हैं, यदी इन लोगो को मार भगाया भी गया तो दूसरे आएगे और वे सारी धरती को नष्ट कर देंगे

इन बातों को सोचते धरती के ज्यादातर लोगों का कहना था कि धरती की रक्षा के लिए उन्हें धरती का 1ध्3 पानी दे दिया जाए

परंतु वैज्ञानिकों का कहना था कि यदि धरती से कुछ लाख लिटर पानी भी कम हुआ तो इस से पर्यावरण और वातावरण को खतरा पैदा हो जाएगा

धरती का 1ध्3 पानी कम हो जाने के बाद धरती का तापमान बहुत बढ जाएगा उसके तापमान के कारण धरती के 70 प्रतिशत वन संमपती नष्ट हो जाएगी

 उत्तरी, दक्षिणी  धुव पिघल जाएगे ,बढते तापमान को मानव सहन नही कर पाएगा और कुछ दिनों में ही धरती की आधी आबादी मर जाएगी

यदि धरती पर जीवन को कायम रखना है तो कोशिश इस बात की की जानी चाहिए कि धरती से एक लिटर पानी भी कहीं और ना जाए ''

दुनिया के सारे नेताओं ने धरती को इस संकट से बचाने के लिए कोई उपाय ढूंढने की अपील की

अपने नेताओं की अपील पर दुनिया के करोडों लोग इस संकट से बचने का मार्ग ढूढने लगा

उनमें एक विज्ञान का छात्र राजू भी था

राजू के पिता वैज्ञानिक थे वह उनके कंप्यूटर में जमा विज्ञान की सारी जानकारियों को पढते इस संकट से बचने का मार्ग ढूंढने लगा

धरती को बचाने के लिए केवल दस दिन का समय मिला था उस संकट से बचने का मार्ग ढूंढने में दिन पर दिन बीतते जा रहे थे और समय कम हो रहा था

दस दिन बीत जाने के बाद एक ही रास्ता बाकी रह जाता था

उन लागों को धरती का 1ध्3 पानी ले जाने की अनुमती दे दी जाए और बाद में धरती के नष्ट होने का चुप चाप तमाशा देखा जाए

अचानक एक दिन राजू को कंप्यूटर में एक ऐसी जानकारी मिली जिसे पढकर वह उछल पडा

2018 में किसी वैज्ञानिक ने पता लगाया था कि दूर किसी ग्रह पर एक ऐसी गैस है यदि वह थोडी सी भी समुंद्र में उंडेल दें तो समुंद्र का सारा पानी सिमट कर बर्फ की तरह केवल कुछ किलो का एक ठोस पध्दार्थ बन जाएगा

परंतु यदि धरती पर उस समय जाकेनाजम नामी एक गैस रही तो फिर उस गैस का कोई भी प्रभाव पानी पर नही होगा ज़ाकेनाजम गैस किस तरहा बनाई जाए उस का सुत्र भी उस वैज्ञानिक ने दिया था

राजू ने तुरंत भाता के प्रमुख से संपर्क स्थापित कर के सारी बातें बता दी और उस गैस का फार्मिला भी उसे देदिया

'' ठिक है राजू बेटे '' भाता प्रमुख बोले ''यदि ऐसी बात है तो हम अभी उस सुत्र से गैस बना कर सारी दुनिया में फैला देते है ''

तुरंत उस सुत्र से गैस बना कर दुनीया मैं फैलाई जाने लगी मुददत समाप्त होने से दो दिन पहले उन लोगो से संपर्क स्थापीत कर के कहा गया कि वे प्रशांत महा सागर का सारा पानी लेजा सकते है

उन लोगों ने गैस छोडी परंतु जाकेनाजम गैस के हवा में होते प्रशांत महा सागर के पानी की एक बुंद भी नही जम सकी

उन्हों ने बहुत प्रयत्न किया परंतु हर बार निराश हुए अंत वे निराश वापस लौट गए जाकेनाजम वायू के होते अब वे कभी भी धरती से एक बुूंद पानी भी नही लेजा सकते थे

उन की असफलता पर सारी दुनिया में खुशियां मनाई जा रही थी

धरती पर आया संकट एक भरतीय बालक राजू की बुध्दी मानी और शोध से टला था

 

-----------------समाप्त--------------

पता:-

एममुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

 

सोने की नगरी

लेखक:-एममुबीन

 

सारी दुनिया में प्रो पाल के सो की नगरी की धूम मची  हुई थी समाचार पत्र उस नगरी के रंगीन चित्र प्रकाशित कर रहे थे टी वी पर आए दिन उस सोने की नगरी पर आधारित कार्यक्रम  दिखाए जा रहे थे जो कोई प्रोफेसर पाल की साने की नगरी को देख आता था उसे अदभुत नगरी की कहानियां सब को सुनाता वे कहानियां एक दाूरे से होती हजारों लागों तक पहुंच जाती थी

राजा ने भी साने की नगरी के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था उसके मन में भी साने की नगरी देखने कि जिज्ञासा थी एक दिन वे अपने पिता डॉ जय से जिद करने लगा कि वह भी प्रो पाल की सोने की नगरी देखना चाहता है

'पापा आप तो कहते थे प्रोफेसर पाल आप के साथ पढा करते थे इस तरह वे भी आप को अच्छी तरह जानते होंगे मैं ने उनकी सोनी की नगरी के बारे में बहुत कुछ सुना है मैं वह नगरी देखना चाहता हूं मुझे प्रो पाल की सोने की नगरी दिखाने ले चलिए ना'

'बेटे प्रो पाल की साने की नगरी के बारे में मैंने भी बहुत कुछ सुना है उसे मैं भी देखना चाहता हुूं यह भी सच है कि पाल मेरे साथ पढता था परंतु मैं उसके स्वभाव को अच्छी तरहा जानता हुूं आज से दस वर्ष पहले उस  ने देश की कुछ महत्वपूर्ण वैज्ञानिक गुप्त दूश्मन देश को बेचने के आरोप में जेल हुई थी उसने देश से द्रोह किया था जब से उसकी साने की नगरी का चर्चा हुआ है मुझो भय होने लगा है कहीं इस के पीछे देश द्रोह की या देश को नुकसान पहुचाने की उसकी कोई चााल ना हो ऌसलिए हम कल ही उसकी साने की नगरी देखने जाएगे '

प्रोफेसर पाल की साने की नगरी शहर से पाँच सौ लिों मिटर दूर एक पहाडी के दामन में बसी थी चारों ओर से घिरी पहाडीयां एक तरहा से उस नगरी की रक्षा करने का काम कर रही थी केवल एक रास्ता था जिस के द्वारा नगरी में पहुंचा जा सकता था

राजा औ डॉ ज़य रात में रवाना हुए

 सवेरे वे प्रो पाल की नगरी में पहुंच गए थे नगरी के प्रवेश द्वार पर उन्हें रोक लिया गया

''हर किसी को नगरी में प्रवेश करने की अनुमती नही है''रक्षको ने उन्हें जब रोका तो डॉ ज़य ने अपना कार्ड उन्हें दे दिया और कहा की वे यह कार्ड प्रो पाल को दे दें रक्षक कार्डलेकर गए और थोडी देर बाद वापस आए और उन्हें पुरे सम्मानपूवर्क भीतर ले गए जहां प्रो पाल उन की राह देख रहे थे

'डॉ ज़य मेरे यार मै समझा था तुम मुझे भ्ूुल गए परंतु ऐसा नही हुआ मेरे सोने की नगरी का मोह तुम्हे यहां खींच लाया आओ में तुम्हें और तुमहारे बेटे राजा को अपनी सोने की नगरी सवंय दिखाता हुं ''

उस के बाद के बाद प्रो पाल ने सवंय उन्हें सोने की नगरी दिखाई कई छोटी छोटी इमारतें थी जो पूरी साने से बनी थी उन में जो इंटें लगी थी दरवाजे,पतरें,खिडकीयां इता हर चीज सोने से बनी थी एक छोटा सा बाग था जिस में पौदे,फल,फुल सब सोने के थे उस में कई जानवरों की बडी छोटी मुर्र्र्र्र्र्र्तीयां भी थी जो सोने की थी टेबल,कुर्सी,लास वहां पर हर चीज सचमुच सोने की थी पूरी नगरी की सैर कराने के बाद प्रो पाल बोला

''जय मै तुम्हें वह चीज भी बताउगा जो आज तक किसी को नही बताई मेरी प्रेयोग शाली जहां सोना बनता है'

इस के बाद प्रो पाल उन्हें अपने प्रयोग शाला में ले गया

वह एक बहुत बडी इमारत थी भीतर किसी बडे से कारखाने की तरह ही जैसे कोई बडा सा स्टील बनाने का कारखाना होता है

भीतर उसी तरहा सोना बन रहा था जिस तरहा लोहा या स्टील बनाया जाता है और उस सोने को तरहा तरहा की चीजो का आकार दिया जा रहा था

ज़ैसे कही इमारते बनाने के लिए इंट,खिडकी ,दरवाजे बनाए जा रहे थे तो कहीं जीवन अवश्यक वस्तंएें जैसे कुर्सी,टेबल, बर्तन इता बनाए जा रहे थे

''देखा डॉकटर मेरा अविष्कार '' प्रो पाल बोला 'सारी दुनिया हजारों लाखो फुट गहरी खुदाइ करती है तो हजारों महंगी  प्रक्रियाओं के बाद दस बीस गा्रम सोना जमीन से निकाल पाती है और मैं तो अपने अविष्कार से लोहे और स्टील की तरह सोना बना रहा हुू बोलो मैं दुनिया का महान वैज्ञानिक हुं या नही ''

'वह तो ठिक है परंतु तुम यह सब किस लिए कर रहे हो?'डॉ ज़य ने पुछा

''इस देश ,इस दुनिया पर राज करने के लिए'' प्रो पाल बोला ''एक दिन इस सोने के बल पर में इस देश और सारी दुनिया पर राज करुंगा '

'क्या इन सब की तैयारी के लिए तुम ने किसी विदेशी शक्ति की सहायता ली है?'राजा के पीता ने पूछा

'ली है ' पाल बोला उन की सहायता के बिना मैं यह सब कर ही नही सकता था '

डॉ ज़य का दिमाग बडी तेजी से काम करने लगा

वे शाम तक प्रो पाल की सोने की नगरी में रहे फिर वापस अपने घर चल दिए

'पापा सचमुच कितनी विचित्र बात है ना हम हजारों प्रक्रियों कर के लाखों रुपया र्खच कर के दो तीन किलो सोना धरती से निकाल पाते है परंतु वहां तो सोना लोहे की तरहा बन रहा था' राजा बोला

'वह ठिक है बेटे परंतु प्रो पाल की विदेशी शक्तियों से लि गई सहायता मुझे तो किसी षडयंत्र की बू आ रही है'

'क्या षडयंत्र हो सकता है पापा'

'अरे जब प्रोफेसर पाल का सोना बाजार में आएगा तो असली सोने की कोई किमत नही रहेंगी देश में सोने के भाव गिरने लगे गे और रुपये का भाव भी रुपया काैडियों के मोल के बराबर हो जाएगा इस तरह हमारा देश आथिर्क रुप से नष्ट हो जाएगा'

'हां यह तो है' राजा बोला 'यह हमारे देश का नष्ट करने का षडयंत्र है परंतु हम किसी तरहा अपने देश को बचा सकते है' ''

'सब से पहले हमें इस बात का पता लगाना पडेंगा कि प्रो पाल सोना किस तरहा बना रहा' डॉ ज़य बोले

दूसरे दिन से वे इस बात का पता लगाने में जुट गए कि प्रो पाल किस तरहा सोना बना रहा है

एक सपताह बाद प्रो पाल ने धमकी दी

'मुझे देश का प्रधान मंत्री बना दिया जाए  यदि ऐसा नही किया गया तो में अपना बनाया सारा सोना बजार में ले आउंगा जिससे असली सोने का भाव गिर जाएगा और देश अथिर्क रुप से नष्ट हो जाएगा मुझे गिरफतार करने या मेरे विरुध कारवाई करने की कोई कोशिश भी ना कि जाए क्यों कि यदि एैसा किया गया तो लाखों टन सोना जो मेें सारे देश में पहुंचा चुका हुू मेरी गिरफतारी या मेरे विरुध कारवाई के साथ ही बाजार में आजाएगा और अंजाम वही होंगा इस लिए देश की भलाई इसी में है कि मुझे प्रधान मंत्री बना दिया जाए'

प्रो पाल की धमकी से सारा राष्ट्र सनन रह गया

सच मुच ऐसी स्थिती थी कि यदि पाल की बात नही मानी जाए तो सारा देश नष्ट हो जाएगा

इधर डॉ ज़य रात दिन इस बात का पता लगाने में लगे थे कि पाल सोना किस तरहा बना रहा है आखिर वे एक दिन इस बात का पता लगाने में सफल रहे

'पापा आप ने पता लगा लिया प्रो पाल किस तरहा सोना बना रहा है?' राजा ने अपने पीता से पुछे

'हां'डॉ ज़य बोले ' बडा आसान तरीका है ज़िस तरहा पानी ी2वसे मिल कर बनता है यानी बो हायडरोजन के अनु और एक आकसीजन के अनणू से यदि दो हायडरोजन और एक ओकसीजन के अनु मिलाए तो पानी बन जाएगा यदि पानी से ओकसीजन का अणू निकाल दे तो हायडरोजन बन जाएगा इसी तरहा सोना भी कुछ अणूओं से मिल कर बनता है सीलीयम नामी धात में वे सारे अणू पाए जाते है जो सोने में पाए जाते है सीलीयम से एक ह3 निकाल दिया जाए तो शेष पध्दार्थ सोना बच जाता है

प्रो पाल सीलीयम से ह3 जो एक गैस है निकाल कर सोना बना रहा है यदि उस के सोने पर ह3 गैस छोछ दी जाए तो प्रक्रिया से वह सोना फिर सीलीयम धात बन जाएगा मैं अभी प्रधाप मंत्री को खबर करता हुं पाल की धमकी से ना घबराऐं में ह3 गैस तैयार कर रहा हुं वह गैस उस घाटी में छोड दी जाए जहां सोने की नगरी है और जहां पाल सोंना तैयार करता है वह गैस सारे सोने को सीलीयम धातू बना देगी पाल ने जो सोना बाजार में लाया है उसे भी इसी तरहा परख कर नष्ट कर के देश पर आए संकट को टाला जा सकता है ''

दो दिन बाद सेना के विमान पाल की सोने की नगरी पर ह3 गैस छोड आए जिस के कारण वह धातू की बन गई जो बाजार में था उसे भी इसी तरहा नष्ट कर किया गया और प्रो पाल

को देश द्रोहि के आरोप में गिरफतार कर लिया गया

राजा के पीता डॉ ज़य की वैज्ञानिक खोज के कारण यह संभव हो सका

समाप्त

 

पता:-

एममुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

 

आत्म विश्वास

लेखक:-एममुबीन

 

  एक सप्ताह पहले से ही उपग्रह श्रवन -5में बिगाड के संकेत मिलते रहे और अंत आठ दिन बाद उसने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया

  जब यह खबर राजू के पिता डॉ रवि को मिली तो उनके मन को घहरा आघात लगा

  श्रवन -5 उन का बनाया हुआ उपग्रह था  जो छ मास   पहले अंतरिक्ष में भेजा गया था और वह बहुत अच्छी तरह काम कर रहा था वह उपग्रह कुछ ऐसे भी काम कर रहा था जो आज तक दुनिया का कोई भी उपग्रह नही कर पाया था

  वह उप ग्रह एक साथ दो हजार टी  वी चैनल प्रसारित कर रहा था दो करोड टेलिफोन लाईन उससे जुडी थीं मोसम की एक एक क्षण की जानकारी दे रहा था उसके द्वारा भारत के किसी भी शहर की छोटी से छोटी सडक को भी फोकस कर के उसके चित्र, वहा घट रही घटनाओं की जानकारी इता ली जा सकती थी उतना सफल और उपयोगी ग्रह बनानें पर चारों ओर से डॉ रवि की जय जय कार हुई थी

  परंतु उस के विफल हो जाने से चारों ओर से डॉ रवि को आलोचना का सामना करना पड रहा था

  ''डॉ रवि श्रवन -5 क़े बंद हो जाने से दो हजार टी  वी चैनल बंद हो गए है दो करोड टेलिफोन लाईन बेजान हैं और मौसम की मामूली सी जानकारी भी हम प्राप्त  नहीं कर पा रहे है क्योंकि श्रवन 75 की सफलता के बाद हम ने हमारे दूसरे सभी उपग्रह से संपर्क तोड लिया था श्रवन-5 के बंद हो जाने से हमारा अरबों खरबों रुपयों का रोजाना नुकसान हो रहा है देश की संचार व्यवस्था ठप हो चुकी है ''

  चारोें ओर से डॉ रवि को ताने दिए जा रहे थे और उन्हें भी पता था श्रवन -5 क़े बिगड जाने से देश कितने बडे सेकट में फंस गया है

  काम चलाने के लिए दूसरे देश के उपग्रह का सहारा लेना पड रहा था ज़ो लज्जा की बात थी   पिता को चिंता में डूबा देख राजू से रहा नही गया वह उन्हें टोक बैठा 

  ''डैडी कुछ तो पता चला होंगा कि श्रवन -5 ने आखिर काम करना क्यों बंद कर दिया है ?''

  '' बस इतना अनुमान लगाया जा सकता है कि श्रवन -5 में एक शार्ट सर्कट हुआ जिस के कारण उसके कई महत्वपूर्ण तार जल गए और उसने काम करना बंद कर दिया''

   ''यदि शार्ट सर्कट से बिगाड आया है तो उसे दुरुस्त भी तो किया जा सकता है '?

  ' नही बेटा, किसी उपग्रह में बिगाड आजाता है तो फिर वह हमेशा के लिए बैकार हो जाता है उसे उसी स्थिति में छोड दिया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है क्याकि उसे केवल धरती पर ला कर ही सुधारा जा सकता है जो बहुत कठिन काम है' डॉ रवि विवश्ता से बोले

   'परंतु श्रवन-5 क़ा बिगाड तो एक मामूली बिगाड है क्या अंतरिक्ष जा कर उसे सुधारा नही जा सकता'?

   'अभी तक तो ऐसा नही हुआ है परंतु यदि संभव हो भी तो कौन अंतरिक्ष में अकेला जा कर अकेले उस उप ग्रह पर रहते जान जोखम में डाल कर  उसके बिगाड को सुधारने की कोशिश करेंगा ?'

   'यह काम मेै कर सकता हूं डैडी' ''राजू बोला' श्रवन-5 के बिगड जाने से देश को बहुत बडा नुकसान हुआ है देश संकट में पड गया है देश पर आया संकट दूर करने के लिए में श्रवन -5 पर अकेला जा कर उसके बिगाड को दुरुस्त करने के लिए तैयार हुू चाहे अकेले महीनों  मुझे वहां रहना पडे'

   राजू के आत्म विश्वास को देख कर डॉ रवि की ऑंखों में चमक आ गई

   'सचमुच बेटे हमने आज तक इस दृ्रष्टिकोन से सोचा ही नही सच मुच इस तरह से श्रवन -5 की दुरुस्ती संभव है और मुझे पूरा विश्वास है तुम यह काम बहुत आसानी से कर सकते हो  क्योंकि भौतिक शास्त्र के विद्यार्थी हो मैं तुम्हें श्रवन -5 क़े सभी सर्कट के नकशे दे दूंगा और नीचे से संपर्क बनाए रखूंगा और अवश्यक निर्देश भी देता रहुंगा  मैं कल ही इस संबध में सरकार से बात करता हुू'

डॉ रवि ने सरकार से जब इस बारे में बात की तो उन्हें उत्तर मिला

   ''यदि श्रवन -5 पर जा कर उसके बिगाड को दुरुस्त करने का प्रयत्न किया जाना संभव है तो  तो यह तो बहुत अच्छी बात है यदि इस प्रकार श्रवन -5 काम के योय बन सकता है तो हम आप की हर तरह से सहायता करने तैयार है ''

    राजू को एक अंतरिक्ष यान द्वारा अवश्यक वस्तुओं के साथ श्रवन -5 पर ले जाने और वहा से लाने का प्रबंध कर दिया गया 

    राजू और डॉ रवि अपनी तैयारियों में लग गए परंतु दुनिया वालों को जब यह पता चला कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा खराब हुए उप ग्रह पर जा कर उसे दुरुस्त करने का प्रयतन किया जाने वाला है तो सब मजाक उडाने लगे 

    ''भारतीय सरकार और भारतीय वैज्ञानिक पागल हो गए हैं एक ऐसा काम करने जा रहे है जो आज तक संभव नही हो सका  आजतक खराब उपग्रह को बनाने का किसी ने भी प्रयत्न नही किया जो उप ग्रह खराब हो हया उसे नष्ट कर दिया गया परंतु उसे दुरुस्त करने का प्रयत्न  ़ ़ ़ ़ ़हां    ़ ़हां  ़ ़हां '

     दुनिया के वैज्ञानिक मजाक उडाते रहे :

इस काम को करने से सामने आने वाले संभवित खतरों से डराते रहे परंतु राजू और डॉ रवि अपने इरादे पर डटे रहे 

     'डैडी आप समझ लीजिए मैं देश के लिए युध्द भूमि में जा रहा हुू 'राजू बोला 'यदि यह काम करते हुए मेरी मौत हो गई तो मैं समझूंगा मैं देश के लिए शहीद हो गया '

     निश्चित दिन एक विशेष अंतरिक्ष  यान द्वारा राजू सारे जरुरी सामान के साथ श्रवन-5 पर उतर गया   

    यह उप ग्रह दूसरे उप ग्रह से काफी बडा था तीन मंजिला इमारत के आकार का होगा जिस में कई कमरे थे 

    उसने एक कमरे में डेरा जमा लिया और सर्कट से उपग्रह को होने वाले नुकसान का अनुमान लगाने लगा

    एक दिन में उसने सारे नुकसानों की सुचि बना कर अपने डैडी को भेज दी थी उन नुकसानों का  पता लगाने के बाद वही बता सकते थे कि उपग्रह दुरुस्त हो सकता है या नही

   शाम को डॉ रवि का संदेश आया

   'राजू बेटे, तुम ने जो क्षति की जानकारी दी है वह दुरुस्त की जा सकती है और दुरुस्त किए जाने पर उपग्रह अपना काम शुरु कर सकता है तुम काम में जुट जाओ'

   राजू तुरंत काम में लग गया वह अंतरिक्ष में, उस उपग्रह पर अकेला था परंतू उसे कोई भय नही लग रहा था वह रात दिन बिना आराम किए काम करता रहा उसे धरती से उस के डैडी मार्गदर्शन देते रहे

   आठ दस पंदरह बीस दिन बीत गए  राजू अपने काम में लगा रहा

   सारी दुनिया में कुतुहल मचा रहा एक भारतीय लडका एक बिगडे उपग्रह को दुरुस्त करने का असंभव काम कर रहा है

25 वे दिन राजू ने सारे बिगाड दुरुस्त कर डाले परंतु फिर भी उपग्रह ने काम करना आरेंभ नही किया था तो वह निराश हो गया

  परंतु उस ने हिम्मत नही हारी आत्म विशवास के साथ काम करता रहा

  अंत 27 वें दिन उप ग्रह ने काम करना आरंभ कर दिया पूरे भारत में खुशियां मनाई जाने लगी सारी दुनिया आर्श्चय में पड गई

  भारतीय वैज्ञानिकों ने ,एक साधारण बालक ने अपने देश की सेवा की भावना से अपने आत्मविश्वास के बल पर एक ऐसा काम कर दिखाया था जो आज तक संभव नही हो सका था

  28 वें दिन एक अंतरिक्ष यान राजू को लेने श्रवन -5 पहुंचा तो सारी दुनिया में उसके स्वागत की तैयािरयां चल रही थी

समाप्त

 

 

 

पता:-

एममुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

 

 

 

राजू का इन्साफ

लेखक:-एममुबीन

 

 

एक गडगडाहट की तेज आवाज जिसे सुनकर राजू की ऑंख खुल गई पलंग से उठकर वह खिडकी के पास आया ख़िडकी से बाहर झांक कर उसने देखा तो उस का दिल धक से रह गया  बाग में एक विचित्र सी चीज खडी थी

   ऐसा उनुभव हो रहा था जैसे वह कोई अंतरिक्ष यान है जो किसी दूसरी दुनिया से आया है अभी वह यान को भी ठीक तरह से देख नही पाया था कि यान का दरवाजा खुला और उसमे सें कुछ विचित्र से मानव उतरे

   उनका कद मुश्किल से एक या दो फुट होगा दुबले पतले चेहरे पर छोटी छोटी ऑंखे सिर पर दो लंबे लंबे कान या सींग छोटे छोटे दुबले पतले हाथ पांव 

   अभी वह उन्हे ठीक तरह से देख भी नही पाया था कि एक तेज रौश्नी चमकी और फिर उस प्रकाश से उसका कमरा भर गया

   उसने अपनी ऑंखे बंद कर ली

 ऑंखे खोली तो उसका मन धक से रह गया

वे ूदुसरे ग्रह के विचित्र वासी उसके कमरे में थे ऌससे पहले कि उस के होंठो से कोई बात निकलती उनमें से एक व्यक्ति ने एक छोटी सी पिस्तौल राजू की ओर तान दी उस पिस्तौल से एक शोला निकला और उसके बाद क्या हुआ राजू को कुछ याद नही रहा

   वह अचेत हो गया था

   होश में आया तो उसे ऐसा अनुभव हुआ जैसे वह किसी अंतरिक्ष यान में यात्रा कर रहा है धीरे धीरे उसे सब याद कुछ जो उसके साथ हुआ आया तो वह घबरा गया

   ''मैें कहां हूं'' उसके मुंह से निकला तो उसे उन विचित्र लोगों ने आकर कर घेर लिया

   '' हम टुंबाटो ग्रह के वासी है हे  मानव '' एक बोला

   '' परंतु तुम मुझे कहां ले जा रहे हो ?''

   '' हम आप को टुंबाटो गह्र ले जा रहे है 'उत्तर मे वह जीव बोला

   ' परंतु क्यों?'

   'टुंबेटो ग्रह के कुछ विवाद है जिन का निर्णय कई सालों से नही हो पाया है  हमे पता चला है कि धरती पर बसने वाले मानव पूरे बा्रहमांड में सब से अधिक न्याय प्रिय प्राणी है  ऌसलिए हमारी उच्य सभा ने यह तय किया है कि टुंबाटो ग्रह पर बरसो से चल रहे सभी विादों के फैसलाें के लिए धरती से किसी मानव को लाया जाए  उस कार्य के लिए हम टुंबाटो ग्रह के वासी बकोली आप को टुंबाटो ग्रह ले जा रहे है मानव ''

''मेरा नाम राजू है ' राजू ने अपना परिचय कराया उसे अपहरण कर के किसी और ग्रह ल ेजाया जा रहा है उसे यह पता चल गया था और उसे वहां न्यायधीश की भूमिका निभाते हुए कुछ महत्वपूर्ण फैसले करने थे उसे अपने इस काम का पता भी चल गया था

   दो दिन बाद वह टुंबाटो ग्रह पहुंचे 

वहां पर राजू का स्वागत बकोली लोगों ने बडे उत्साह से किया राजू के स्वागत के लिए हजारो लाखें बकोली जमा हो गए थे और वे उसे उत्साह से उसका स्वागत कर रहे थे जिस तरहा धरती पर किसी बडे राज नेता का एक देश से दूसरे देश जाने पर होता है

   स्वागत सत्कार के बाद उसे न्यायधीश की कुर्सी पर बिठा दिया गया उस न्याय सभा में हजारों बकोली उपस्थित थे

   ''भाईयों ' एक बकोली उठा''वरान राज्य के राजा के रुप में मैं इस न्याय सभा में आप सभी का स्वागत करता हुू टुंबाटो ग्रह पर कई राज्य हैं जिन के कई राजा हैं यह राज्य सदियों से छोटी छोटी बातों के लिए आपस में टकरा रहे हैं लाखों जानें जा चुकी है परंतु कोई निर्णय नहीं हो पा रहा है अंत सारे राजाओं ने तय किया कि सारे विवाद आपसी सहमती समझबुझ से सुलझा लिए जाएं और यह खुन खराबा हमेशा के लिए बंद हो जाए ,परंतु हर फैसला न्याय संगत होना चाहिए हमारे फैसले गलत हो सकते हैं और हो सकता है सभी उन्हें ना माने ऌसलिए हम ने धरती से इस कार्य के लिए एक मानव राजू को बुलाया है मानव बडे न्याय प्रिय होते है हमारे विवादों का राजू अच्छा फैसला कर सकता है'''

   '' हम मानव राजू के सारे फैसले मानेगे ' सारे बकोली एक स्वर में बोले

   ' सब से पहली समस्या का नाम झील के पानी की समस्या है '''बकोली बोला 'यह झील चार राज्यों की सीम पर पडती है हर राज्य यह दावा करता है कि यह झील उसकी है वही इस झील के पानी का उपयोग करेगा दूसरे को एक बूंद पानी लेने नही देगा ऌस लिए सदियों से खून खराबा हो रहा है उस झील के पानी की एक बुूद तक को अभी तक कोई भी राज्या उपयाग नही कर सका परंतु उसके  पानी के लिए उसने लाखों लोगों का खून अवश्य बहाया है इसके बारे में मानव राजू फैसला करे ''

   'फैसला करने की कोई जरुरत नहीं ''राजू बोला ''झील चार राज्यों की सीमा पर स्थित है तो चारों राज्यो  की मिलकियत है चारों राज्य उसके पानी का उपयोंग कर सकतें हैं झील को चार भागों में बांट दिया जाए, हर राज्य अपने हिस्से में आए भाग से ही पानी ले ताकि कोई विवाद और झगडा पैदा ही नही होगा ''

   ''अरे वाह यह तो बहुत अच्छी बात है '' बकुली लोगों के चेहरे खिल उठे

   ' हमे यह फैसला मंजूर है '

   'मानव राजू का न्याय जिंदा बाद'' 

   'यहां का कानून है यदि राज्य में रहने वाला बकुली दुसरे राज्य में चला जाए तो उसकी हत्या कर दि जाती है जब कि हर राज्य के बकुली कि इच्छा होती है कि वह दूसरे राज्य में जाए   ऌस समस्या का कया हल है? '

   ' एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने पर हत्या कर देना महा पाप है 'पूरा ग्रह एक है फर्क सिर्फ इतना है कि लोग राज्यो में बटे हैं हमारे यहां एक देश से दूसरे देश जाने में कोई पाबंदी नही है लोग आजादी से पूरी दुनिया में कहीं भी आ जा सकते है केवल इसके लिए उन्हें अपने देश का पहचान पत्र पास पोर्ट और दूसरे देश के आने की स्वीकृती वीजा लेना पडता है आप लोग भी इस पध्दती का उपयोग कर के सदियों के अमानुषी कानून को खत्म कर सकते है ''

   'हमे यह मंजूर है ' सब एक स्वर में बाले

   ' मानव राजू का दूसरा फैसाला भी स्वीकार किया जाता है' राजा बोला

   ' मानव राजू जिंदा बाद '

   ' हमारे राज्यों में कुछ ऐसी चिजें पैदा होती है जो ूदूसरे राज्यों में पैदा नही होतीं, जब की दूसरे राज्यो के लोग उन्हे खाना ,लेना चाहते हैं परंतु एक राज्य की चीज दूसरे राज्य में ना जाने के  कानून के कारण ऐसा संभंव नही हो पाता है '

   'आप उस कानून को तोड दीजिए और व्यापार के नियम को अपनाईए ' राजू बोला ' आप के राज्य में जो चीजें पैदा होती है दूसरे राज्य में लेजा कर बेचिए जो चीजें आपके यहां पैदा नही होती है दूसरे राज्य में पैदा होती हो वह वहां से मंगवाईए '

   ' अरे वाह यह तो बहुत अच्छी बात है ऌस प्रकार से हमे सारे राज्यो की चीजें खाने को मिलेंगी 'कोई उछल कर बोला ' और हमे हमारी चीजें दूसरे राज्यों में बेच कर पैसा कमाने ,व्यापार करने का अवसर भी मिलेंगा '

   ' हमे मंजूर है ' सब एक स्वर में बाले और राजू कि न्याय की जय जय कार करने लगे '

   राजू कई दिनों तक वहां रहा उस ने इस बीच सेंकडों सदियों से चले आ रहे विवादों के फैसले कर दिए जिसे सभी ने स्वीकार कर लिया

   हर किसी को राजू का इन्साफ पसंद आया

   एक महीने बाद एक विशेष यान राजू को वापस धरतर पर उसके घर छोड गया 

समाप्त

 

 

पता:-

एम मुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

टुंबाटी ग्रह पर खतरा

लेखक:-एम मुबीन

 

 

धरती के वैज्ञानिक और राजनेता टुंबाटी ग्रह की सैर करने के बाद धरती पर वापस जाने की तैयारी में थे कि धरती पर भारतीय प्रतिनिधी के रुप में आए डॉ क़बीर के पुत्र हुनैन ने एक धमाका किया

   'कुछ महीनों में ही पूरा टुंबाटी ग्रह नष्ट हो जाएगा'

हुनैन की इस बात पर किसी ने धयान नही दिया क्यों कि धरती से आने के बाद दूसरे दिन बाद ही हुनैन ने घोषणा की थी

   'टुंबाटी ग्रह जिस तरहा बसा है और यहां पर जिस धातु का सब से अधिक उपयोग किया गया है किसी दिन उस घातु के कारण पूरा टुंबाटी ग्रह नष्ट हो जाएगा ''

   हुनैन की उस बात पर भी उसे बच्चा समझ कर किसी ने ध्यान नही दिया था और सभी टुंबाटी ग्रह की सैर में लग गए थे

   हुनैन का कहना था टुंबाटी ग्रह पर हर वस्तु को बनाने में 'मंकार' नामी धातु का उपयोग किया गया है चाहे रोबॉट, कंप्यूटर,घर हो, बडी बडी प्रयोगशाली, हथियार वाहन हो या घर दार हर किसी में मंकार का उपयोग किया गया है क्यों कि यह घातु टुंबाटी ग्रह पर बहुत मिलती है धरती पर केवल इसकी कलपना ही की जा सकती है इस घातु की विशेषता के बारे में संक्षिप्त में यही कहा जा सकता है कि धरती पर मिलने वाली हर धातु की विशेषता इस में है इस प्रकार एक धातु मंकार में सैंकडो धातुओं की विशेषता है जैसे लोहे फौलाद से हजार गुना अधिक सख्ती,तो सोने सा चमकीला पन अलोमेनियम की तरह हलका पन इता इता

    इन्ही सैंकडों धातु की विशेष्ता के कारण लेजर और अंणू का धमाका भी इस धातु पर कोई प्रभाव नही डाल पाता और इसे अपनी सुरक्षा कवच मानते थे अपने शरीर पर इसी धातु का कवच पहेंनते थे जो उन्हें हर तरह की सुरक्षा प्रदान करती थी 

    उस धातु को नष्ट करने वाला कोई भी तत्व पुरे बा्रमांहण में मौजूद नही था

    परंतु हुनैन ने इसे गलत बताया था

    उसने सौ गैसों के नाम बताए थे सौ गैसो को मिला कर एक नई गैस बनाई जाए तो उस गैस के सामने मंकार विफल हो जाएगी

    उस गैस के मंकार से मिलते ही मंकार के धातु तत्व रासायनिक प्राक्रिया आरंभ कर देंगे और मंकार पानी की तरहा बन कर पिघल जाएगी और यदि वह गैस टुंबाटी ग्रह पर पैदा हाें गई तो पूरा ग्रह नष्ट हो जाएगा क्यों कि इस ग्रह पर हर वस्तु में मंकार का उपयोग किया गया है और टुंबाटी ग्रह पर जीवन ही समाप्त हो जाएगा

    फिर कुछ दिनों के भीतर ही हुनैन ने जब यह घोषणा भी कर दी कि केवल कुछ महीनों में ही टुंबाटी ग्रह नष्ट हो जाएगा तो भी किसी ने गंभीरता स ेनही लिया सब उस का मजाक उडाने लगे कि इतने वैज्ञानिक रुप से प्रगत ग्रह अचानक किस प्रकार नष्ट हो सकता है

    धरती के वासिओं ने हुनैन की इस  बात को भले ही गंभीरता से नही लिया परंतु टुंबाटी वासीओं ने जरुर लिया

 सम्राट योकोटी ने हुनैन को बुला कर पूछा

    'हुनैन बेटे तुम किस आधार पर कह रहे हो कि चार पांच मास में पूरा टुंबाटी ग्रह नष्ट हो जाएगा?' 

    'इस ग्रह की हर चिज के बनाने में मंकार धातु के उपयोग के कारण एक दिन यह ग्रह नष्ट हो जाएगा' हुनैन बोला

    'परंतु जहां तक हमारे वैज्ञानिकों की खोज और दावा है मंकार धातु को नष्ट करने वाला कोई भी तत्व बा्रहमांण में नही है ' समा्रट योकोटी बोला

    'कोई अकेला तत्व नही है परंतु कई तत्वों के मिलने से वह तत्व बन सकता है'

फिर हुनैन ने उन सौ गैसो के नाम बताए

'इन सौ गैसों के मिश्रण से जो गैस तैयार होगी वह मंकार को पानी की तरहा पिघला देगी और मेरी दूसरी बात पर ध्यान दीजिए अपने वैज्ञानिकों से पता लगाईए मेरी बात सच है या झूट ''

     जिस आकाश गंगा में टुंबाटी ग्रह है उसी आकाश गंगा के एक सुर्य में एक भयानक   धमाका हुआ है  दुर्भागय से वे सौ गैसे उस सुर्य में हैं उस धमाके बाद वह सारी सौ गैसे आपस में मिल गई होंगी और वह गैस जिस का नाम मै ने 'उसाम' रखा है तैयार हो गई होंगी और वह गैस उसाम धीरे धीरे पूरी आकाश गंगा में फैलेंगी 'उसाम' आकाश गंगा में फैलते फैलते एक दिन टुंबाटी ग्रह तक पहुंच जाएगी और जिस दिन यह गैस टुंबाटी पहुंच गई पूरा टुंबाटी ग्रह नष्ट हो जाएगा क्योंकि उसाम मंकार को पिघला देंगी और मंकार के बिना तो यंहा कि  किसी वस्तु की कलपना भी नही कि जा सकती'

   हुनैन की बात सुनकर समा्रट याकोटी के चहरे पर हवाईया उडने लगी

 उस ने तुरंत आदेश दिया कि इस बात का पता लगाया जाए कि हुनैन जिस धमाके के बारे में कह रहा है क्या आकाश गंगा के किसी सूरज में कोई इस प्रकार का धमाका हुआ है ?

   तुरंत उत्तर मिला कि इस प्रकार का एक धमाका रेकार्ड किया गया है उसके बाद उसने आदेश दिया कि हुनैन की  बताई गैसों के मिश्रण से जो गैस उसाम बन सकती है उसे तैयार कर के कर पता लगाया जाए कि क्या यह गैस 'मंकार को नष्ट कर सकती है वैज्ञानिको ने उसाम बनाकर प्रयांग किया और योकोटी को खबर दि कि सच मुच उसाम गैस मंकार को नष्ट कर देंगी 

   इस बात को सुनकर योकोब्ी के चहरे पर और भी अधिक हवाईया उडने लगी

   उसने फिर आदेश दिया कि पता लगाया जाए की उन की आकाश मार्ग के सुर्य में हुए  धमाके से क्या उसाम गैस बनी होगी? और वह गैस वहां से फैल कर टुंबाटी ग्रह तक पहुंच सकती है'

   वैज्ञानिकों का उत्तर आया उस धमाके से उसाम गैस बनी हैं और वह जिस गति से आकाश गंगा में फैल रही हैं पांच छ मास में टुंबाटी पहुंच कर टेंबाटी ग्रह को नष्ट कर देगी

    इस बात को सुनकर योकोटी दहाडे मार मार कर रोने लगा

''नही ऐसा नही हो सकता मेरा प्यारा ग्रह टुंबाटी नष्ट नही हो सकता मेरा सामराज्य नष्ट नही हो सकता ''

    'सम्राट आप अपने आपको सबसे अधिक शक्ति शाली समझते हुए सारे ब्रहमांड पर राज्य करने का सोच रहे थे सारे ब्रमांहड की शक्ति के लिए खतरा बन गए थे अपने आप को इश्वर समझने लगे थे आप की इस खुदाइ को अंकुश तो लगना था'' हुनैन बोला

    'नही हुनैन बेटे मैं वादा करता हूं अपने इन सम्राज्यवादी विचारों को बदल ूदंगा ब्राहमांड की शक्ति को भंग नही करुंगा धरती की ओर नजर उठा कर भी नही देखुूगा परंतु किसी तरह टुंबाटी ग्रह को नष्ट होने से बचाने का कोई उपाय बताओ कक्या कोई उपाय हैं?''

    'उपाय क्यो नहीं है कई उपाय हैं' हुनैन बोला

'' वे क्या उपाय है? ''

    'उसाम गैस को टुंबाटी की धरती तक पहुचने से रोका जाए-'

    'परंतु यह कैसे संभव है?'

    'संभव हे धरती के गिर्द ओजोन नामी गैस का एक कवच है जिसे ओजोन की छतरी कहा जाता है यह कवच धरती तक उन विषैली किरनों को पहुंचने से रोकता है जो धरती,धरती वासियों के लिए घातक है आप लोगों ने तो विज्ञान में इतनी प्रगति की हें आप लोगों के लिए कोई इस प्रकार का वचन बनाना मुश्किल काम नही है तो 'उसाम' गैस को टुंबटी की धरती पर आने से रोके 'हुनैन बोला

    हुनैन से बात करने के बाद सम्राट योकोटी ने अपने वैज्ञानिको से परामर्श किया तो उनहो ने बताया ऐसा कवच बनाया जा सकता

है जो उसाम को धरती तक आने से रोके और जिसके कारण टुंबाटी पर मंडलाता खतरा टल जाए और टुंबाटी नष्ट होने से बच जाए

तुरतं वहां के वैज्ञानिक ऐसा कवच बनाने में लग गएक्योकि वे इस क्षेत्र में बहुत प्रगत थे इसलिए आसानी से ऐसा कवच बनाने में सफल भी हो गएअौर उन पर छाया खतरा टल गया

धरती के एक इन्सान एक लडके हुनैन के कारण टुंबाटी ग्रह नष्ट होने से बच गया टुंबाटी को विनाश से बचाने के लिए सारे टुंबाटी वासी धरती वासियों और हुनैन के आभारी हैं अब हम कभी धरती पर टेडी नजर नही डालेंगे अौर डाल भी किस तरह सकते हैं? उन की दुखती नस तो अब धरती वासियो को मालूम ही पड गई हैं

     उसाम को रोकने वाले कवच मे एक छोटासा छेद टुंबाटी को नष्ट कर देगा

     अब धरती पर छाया खतरा टल गया था टुंबाटी पर खतरा छाया था

     सब हुनैन के ज्ञान के कारण संभव हुआ था

समाप्त

 

 

 

पता:-

एम मुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

 

 

 

 

टुंबाटी ग्रह की सैर

ले:-एम मुबीन

 

 

सौ के लग भग वैज्ञानिक और राजनेता टुंबाटी ग्रह के वासिओं के साथ उन्ही के अंतरिक्षयान में टुंबाटी ग्रह आए थे

  उन पर यह दायित्व  सोंपा गया था कि वे टुंबाटी ग्रह जाकर वहां के वासिओं की वैज्ञानिक खोंजों और प्रगती का पता लगाए और नियर्ण दें कि टुंबाटी ग्रह के समा्रट योकोटी के सामा्रज्य को धरती पर स्वीकार कर लिया जाए या फिर उनकी मंग को ठुकरा कर उनका मुकाबला करने के लिए कमर कसी जाए

  जैसे ही उनका यान टुंबाटी की धरती पर उतरा लाखों टुंबाटी वासियों ने नारे लगा कर उनका स्वागत किया

  ''टुंबाटी की धरती पर धरती वासिओं का स्वागत है''

  टुंबाटी समा्रट ने आगे बढकर उनका स्वागत किया

''मैें धरती के वासियों का  स्वागत करता हूं मुझे खुशी है के धरती वासियों ने मेरे प्रस्ताव को गंभीरता से लिया और हमारी प्रगती और बल का पता लगाने टुंबाटी ग्रह आए मुझे पूरा विश्वास है कि हमारी वैज्ञानिक प्रगती और बल को देखने के बाद धरती वासी हमारे सामा्रज्य को स्वीकार कर लेंगे और मैें धरती का भी समा्रट बन जाउंगा अगले कुछ दिनों में आपको हमारे ग्रह की एक एक चीज दिखाई जाएगी  ताकि आप के विचार हमारे पक्ष में हो जाए'' 

   वे लोग टुंबाटी ग्रह की हर चीज को आर्श्चय से देखने लगे भारतीय प्रतिनिधी  मंडल का नेतत्त्व डॉ क़बीर कर रहे थे उनका बेटा हुनैन भी जिद कर के उनके साथ आया था।

हुनैन स्वंय एक विज्ञान का छात्र और छोटा मोटा वैज्ञानिक था इसलिए हुनैन को अपने साथ ले जाने का समर्थन हर किसी ने किया था 

   हुनैन देख रहा था जो भी टुंबाटी वासी उनके स्वागत के लिए आए थे हर टुंबाटी के साथ एक दो रोबट थे उन राबटों का प्ररिक्षण करने के बाद हुनैन आश्चर्य में पड गया

   वे ना केवल रोबट थे बल्कि सुपर कंप्यूटर भी थे धरती पर जिस क्षमता के सुपर कंप्यूटर केवल 10,12 थे उतनी क्षमता का सुपर कंप्यूटर हर रोबट था 

   ''क्या टुंबाटी ग्रह पर इतनी ही क्षमता के कंप्यूटर हैं'' हुनैन ने एक टुंबाटी वासी से पुछा तो वह हंसने लगा 

   ''यह तो हमारे साधारण घरेलु कंप्यूटर हैं हमारे एक साधारण सुपर कंप्यूटर की क्षमता इन कंप्यूटर रोबोटों की तुलना में एक हजार से दस हजार गुना अधिक है'' 

   यह बात सुनकर हुनैन चकरा गया

जब उनका साधारण कंप्यूटर धरती के सुपर कंप्यूटर की क्षमतावाला है तो उनके सुपर कंप्यूटर की क्षमता क्या होंगी?

   उन्हें हाथी के से, परंतु हाथी के आकार सें दस गुना बडे शक्ति शाली जानवार बताए गए जिन्हें रिमोट द्वारा जो भी आदेश दिया जाता था वे जानवर वही कार्य करते थे

 बडे बडे पहाडों को एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर रख देते थे 

    बडे बडे पहाडों को एक मिनट में चकना चूर कर के रास्ते बना देते थे

    उन्हे देख कर हुनैन सोचने लगा इन में का एक भी जानवर धरती पर पहुंच जाए तो बडे से बडे शहर को पांच दस मिनट में नष्ट कर के रख देंगा और कुछ दिनों में सारी धरती का विनाश कर देगा

    इस कल्पना से ही वह कांप उठा

    उन्हे ज्वाला मुखी के भाग में ले जाया गया 

    उस क्षेत्र में सैंकडों ज्वाला मुखी थे जो लावा उगल रहे थे परंतु बडी कुशलता से उन सारे ज्वाला मुखियो को नियंत्रित कर के उनका लावा एकत्रित किया जाता था ओर उससे उर्जा का काम लिया जाता था एेसा लगता ही नहीं था कि वह ज्वाला मुखी का क्षेत्र है जहां कदम कदम पर खतरा है

      वह तो किसी कारखाने का दृश्य मालूम पडता था जैसे किसी कारखाने की भटटी में लोहा पिघला कर उसे मन चाहे आकार में ढाला जा रहा है

    उसके बाद उन्हें वहां के मकानों, वाहनों, रोबटों की क्षमता बताई गई वे जिस धतु से बनाए गए थे वह इतनी मजबूत थी कि लेजर किरण भी उनका कुछ नही बिगाड पाती थी ख़ैलते लावे से वे इस तरहा गुजर जाते थे जैसे पानी में तैर कर आ रहे हों उन पर उसका कुछ भी प्रभाव नही होता था 

    उन्हों ने  छोटे छोटे स्वंय रक्षा के लिए उपयोग किये जाने वाले हथियार बताए गए 

    उन की नजरों में लेजर गनें बहुत पुरानी चीजें थी उन्हों ने अणू गन,पिस्तौल निर्माण किए थे

    जिन से गोलियो के बजा छोटे छाटे अणुबंम निकलते थे और फटते थे 

    गा्रेलियों के रुप में उपयोग होने वाले वे छोटे छोटे अणुबंब जब फटते थे तो जो उर्जा पैदा होती थी उ से क्या क्या विनाश हो सकता था इस का अनुमान लगाना ही कठीन था  

  हुनैन ने अनुमान लगाया था कि उनकी पिस्तौल की एक गोली धरती के किसी बडे शहर के एक मोहल्ले को भस्म करने के लिए प्रयाप्त है  

   दूसरे दिन रात को समा्रट योकोटी ने उन्हें दावत दी थी

भेजन के बाद वह अपनी धरती वासियों की क्षमता का एक और अदभुत नमुना दिखाने वाला था

उन्हें एक ऐसी प्रयोग शाला में ले जाया गया जहां एक बडी तोप लगी थी एक बडे से स्क्रीन पर किसी ग्रह का चित्र बार बार उभर डूब रहा था

   ''यह हमारी धरती से हजारों प्रकाश वर्ष दूर एक आकाश गंगा का ग्रह है हम हमारी धरती से कुछ घंटे में उस ग्रह को नष्ट कर सकतें है यह परिक्षण अब आप लोगों को बताया जाएगा'' समा्राट योकोटी ने कहा 

   और फिर तोप दाग दी गई 

   ''आप अपनी ऑंखें से देखेंगे इस तोप से निकली लेजर किरण हजारों प्रकाश वर्ष की दूरी कुछ घंटो में तय कर के उस ग्रह को क्षण में नष्ट कर देंगी जिस का आकार आप की धरती के बराबर का है'' योकोटी बोला 

   स्क्रीन पर कभी उस ग्रह का चित्र उभरता तो कभी उस ग्रह की ओर बढती लेजर किरण का 

   अंत वह उस ग्रह तक पहुंच गई और सचमुच कुछ क्षणों में उस किरण ने उस ग्रह का अस्तित्व मिटा डाला 

   परदे पर एक धमाका हुआ पूरा परदा रोश्नी में नहा गया और फिर धीरे धीरे रौश्नी कम हुई तो परदे पर उस ग्रह का नामो निशान नही था

 सच मुच उस लेजर किरण ने उसे कुछ क्षणों में नष्ट कर दिया था 

   इस दर्शय को देख कर हर कोई कांप उठा

   सभी ने अनुमान लगा लिया कि समा्रट योकोटी का इस दृशय को बताने का यही ध्यय था जैसे वह कह रहा हो 

   ''देखा हमारी शक्ति यदि तुम लोगों, धरती के लोगों ने मेरी बात नही मानी तो में इसी तरह धरती का भी विनाश कर सकता हुू'' 

   उसके बाद उन्हें एक ऐसी प्रयोग शाला में लेजाया गया जहां से सारे बाह्रमांणड पर नजर रखी जाती था 

   टुंबाटी के जासुस उपग्रह हर उस  ग्रह पर नजर रखें हुए थे जहां जहां जीवन था उनमें धरती भी थी

   धरती वालों को तो पता भी नही था कि टुंबाटी ग्रह का एक नजर ना आने वाला उपग्रह धरती के र्गिद घुम रहा है और धरती पर  घटने वाली घटनाओं की पल पल की खबर टुंबाटी ग्रह को भेज रहा है 

    धरती वालोें को तो इस बारे में भी पूरे विश्वास से जानकारी नहीं थी की टुंबाटी ग्रह पर जीवन है भी या नही

    परंतु टुंबाटी के वासी धरती पर राज करने का सोच रहे थे 

    ''मेरा समा्रज्य आधे बा्रहमांणड में फैल गया है यदि धरती वासी मेरे समा्रज्य को स्वीकार करते ं हैं तो फिर पूरे बा्रहमांणड पर राज्य करना मेरे लिया कोई मुश्किल काम नही ''

    और धरती से आए सारे वैज्ञानिक राजनेता टुंबाटी वासियों के वैज्ञानिक प्रगती,शक्ति को देख कर सोच रहे थे, योकोटी के समा्रज्य को स्वीकार करने में ही धरती की भलाई है नहीं तो मिनटों में समा्रट योकोटी धरती को चिंटी की तरहा मसल कर नष्ट कर देंगा  

समाप्त

पता:-

एम मुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

टुंबाटी ग्रह के वासी

लेखक:-एम मुबीन

 

   2056 की बात थी उन के आने की खबर कुछ ही देर में सारे विश्व में फैल गई थी क्यों कि विश्व के सभी अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्रों को पहले उन के आगमन का संकेत मिला था और फिर संदेश 

   ''हम आकाश गंगा कि एक सौर मंडल के एक ग्रह टुंबाटी के वासी है हम बाह्रमांणड के सब से अधिक वैज्ञानिक रुप से प्रगत जीव हैं  हम ने विज्ञान में इतनी प्रगति की है कि अन्य ग्रह के लोग अगले एक हजार वर्षें में भी नही कर पाएंगे इसलिए हम चाहते हैं कि सारी आकाश गंगाओं पर और ऐसे सभी ग्रह जहां जहां जीवन है, पर हमारा नियंत्रण हो  क्योंकि यह हमारा अधिकार है हम इस समय सिर्फ यही प्रस्ताव देने के लिए  धरती पर आ रहे है हम बल, शक्ति, युध्द के जोर पर यह अधिकार प्राप्त नहीं करना चाहते  हम चाहते हैं कि धरती के वासी हमारे विज्ञान में प्रगती, हमारी शक्ति, को देखें परखें और विवेक के आधार पर हमारा वर्चस्व  स्वीकार करें यदि इस के बावजूद भी कोई हमारी श्रेष्टता को स्वीकार नही करेंगा तो फिर हम हमारी शक्ति द्वारा यह श्रेष्टता सिध्द करने का पूरा अधिकार होंगा''

धरती पर उतरते हुए हम कुछ छोटे छाटे वैज्ञानिक चमत्कार बताऐं वह हमारी वैज्ञानिक प्रगति का छोटा सा नमुना होंगा'

    उन्हों ने संदेश भेजा था कि वे अमरिकी अनुसंधान केंद्र नासा पर उतरेंगे

    टुंबाटी के बारे में धरती के लोगों को पता था कि हजारों  प्रकाश वर्ष दूर एक आकाश गंगा में किसी सौर मंडल में टुंबाटी नाम का कोई ग्रह है जहां जीवन के चिन्ह मिलते हैं 

   परंतु उसी टुंबाटी ग्रह के लोग एक दिन धरती पर आकर धरती वासियों को इतनी बडी धमकी देंगे किसी ने सोचा भी नही था

   भारतीय अनुसंधान केंद्र के संचालन डॉ क़बीर और उनका बेटा हुनैन भी टुंबाटी ग्रह के वासियों के अगमान और उनकी धमकी से चिंता में पड गए

   ''डैडी वे लोग क्या वैज्ञानिक चमत्कार बता सकते है?'' हुनैन ने पूछा 

   'ऐसी कोई बात जो आज तक ना हुई हो या जिसका होना असंभव हो' डॉ कबीर ने उत्तर दिया 

   उस समय विश्व के बडे बडे वैज्ञानिक एक दूसरे से हर प्रकार के प्रसार माध्यम पर संबध बनाए विचार विमर्श कर रहे थे कि अचानक पहला चमत्कार हुआ

   सारी दुनिया के कंप्यूटरों ने काम करना बंद कर दिया दुनिया के बडे से बडे और छोटे से छोटे  कंप्यूटर का मानेटर 'खाली' हो गया लाख प्रयत्न करने के बावजूद उन पर कोई संदेश उभर नही पा रहा था जैसे कंप्यूटर बंद हो यह स्थिति केवल कंप्यूटर ही की नही थी बल्कि दुनिया के सारे टी वी सेट भी 'ब्लैंक' हो गय थे किसी भी टी वी पर कोई ध्वनी या चित्र नही उभर रहा था जैसे टी वी सेट बंद हो गया हो

   रेडियो से आवाज गायब हो गई

   सभी टेलीफोन और संपर्क के माध्यम निर्जीव हो गए अावाज संदेश एक ओर से दूसरी ओर जाती ही नहीं थी 

   सारी दुनिया में हा हा कार मच गई 

   यह स्थिति सिर्फ आधे घंटे तक रही आधे घंटे के बाद फिर सब कुछ समान्य हो गया क़ंप्यूटर काम करने लगे टी वी सेट रेडियों,टेलीफोन संपर्क के दूसरे माध्यम चलने लगे

   उस समय तक टुंबाटी के वासी धरती पर उतर चुके थे और फिर आर्श्चय जनक रुप से उनका संपर्क दुनिया के हर संपर्क माध्यम, टी वी, रेडियो, टेलफिोन इता से जुड गया था 

   टी वी पर उनके चित्र उभरने लगे थे, रेडियो पर उनकी आवाज गूंजने लगी थी और अन्य संपर्क माध्यमों पर उनके संदेश आने लगे थे

   यह हमारा एक मामुली सा चमत्कार था इस समय दूनिया के सार संचार माध्यम हमारे कब्जे में हैं  सारे कंप्यूटर हमारे गुलाम हैं वे हमारे आदेश के अनुसार ही काम करेंगे  हम जब चाहे उन्हें बंद कर सकते हैं थोडी देर ही में हम अपना दूसरा चमत्कार पेश करने जा रहे है'

 

   उन्हों ने दूसरा चमत्कार जो पेश किया थोडी देर तक तो किसी को उस का पता ही नहीं चल सका

   क्यों कि बडी आर्श्चय जनक बात हुई थी 

   सारी दुनिया की भाषाऐं और उनके स्वर बिल्कुल बदल गए थे हर कोई अपनी भाषा बोल रहा था परंतु उसके होंटो से कर्कश स्वर निकल रहे थे 

''गडम, बडम,गडम''

   जैसे कर्कश नगाडे बज रहे है, कई वस्तुएं आपस में टकरा रही हैं कोई भी किसी से बात नहीं कर पाता था वह जो कुछ कहता था उसके मुंह से कर्कश स्वर निकल कर सामने वाले को सुनाई देते थे सामने वाला  कहना कुछ चाहता था उसे सिर्फ शोर हंगामा सुनाई देता था 

   क्या करें कुछ देर तो कुछ समझ में नही आया

 परंतु फिर बुध्दीमान लोगो ने मुंह से बोलने कि बजाए कलम से लिख कर एक दूसरे से बात करने की सोची,

'' मैं क्या कह रहा हुं आप समझरहें है?' उन्हों ने लख कर एक दूसरे से पुछा

   'नही मुझे आप की केवल कर्कश आवाज और शोर सुनाई दे रहा है' सामने वाले ने लखकर उत्तर दिया हर कोई परेशान हो गया 

   यह कैसा घोर संकट पैदा हो गया है

सभी की बालने की शक्ति खत्म हो गई लख कर काम चलाना पडेंगा

   रेडियो, टी वी, टेलीफोन पर भी गीत संगीत,संवाद, शब्द के बजाए केवल कर्कश स्वर, शोर गुल ही उभर रहा था 

   आधे घंटे तक यह स्थिती रही 

   आधे घंटे बाद सबकुछ सामान्य हो गया आधे घंटे के बाद फिर टुंबाटी के वासी और उनका संदेश उभरा 

   'यह था हमारा दूसरा चमत्कार इसके बाद तो अनुमान हो ही गया होंगा कि हम कितने शक्ति शाली हैं, इसलिए हमारी शक्ति को नमन करते हुए हमे इस धरती और सारी आकाश गंगाओं का समा्रट स्वीकार कर लिया जाए वरना हम कुछ नही करेंगे आप लोगो से आप की वही शक्ति हमेशा के लिए छीन लेगे जो कुछ देर के लिए छीनी थी और उस समय वापस करेंगे जब टुंबाटी के सामराज्य को सवीकार कर लिया जाएगा '

    उनकी धमकी सुनकर हर कोई सन्नाटे में आ गया

विश्व के सभी राष्ट्रों ने उन्हें संदेश दिया कि धरती पर टुंबाटी ग्रह के साम्रज को सवीकार करने से पहले वे आपस में विचार विमर्श करना चाहते है 

    उन्हों ने इसके लिए एक सप्ताह का समय दे दिया

विश्व के सभी देश इस संबध में विचार विमर्श में लग गए और इस बात का पता लगाने में भी लग गए के जो चमत्कार उन्हों ने दिखाए किस तरहा दिखाए 

    इस बात का पता सब से पहले डॉ क़बीर ने लगाया स्वर, टेलीफो, टी वी के चित्रों और स्वर का एक जगाह से दूसरी जगह जाना सब तरंगो पर निर्भर है तरंग ही है जो यह चीजें एक जगाह से दूसरी जगाह ले जाती है और शायद तरंगो पर नियंत्रण पाने के विज्ञान में उन्हों ने बहुत प्रगति की है 

एक शक्ति शाली तरंग उन्हों ने छोडी और जो तरंगे स्वर, ध्वनी, चित्र को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करती थी उन्हों ने अपना काम बंद कर दिया ,टी वी, रेडियो, टेलीफोन बेजान हो गए कंप्यूटर ने काम बंद कर दिया एक शक्ति शाली तरंग के द्वारा उन्हो ने अपने संदेश का प्रसारण किया और विश्व के सभी टी वी, रेडियो, टेलीफोन पर उन्ही का प्रसारण आने लगा नित्य के प्रसारण कमजोर पड गए एक ऐसी तरंग छोडी जिस ने   ध्वनी की तरंग का विकृर्त कर देती और उन के मुहं से विकृर्त शब्द ध्वनी निकलने लगती'

    ऐसी स्थिति में बिना स्वंय में उनसे मुकाबले का सामर्थ पैदा किए टकरनार् मुखती होंगी 

    इस लिए सभी देशों ने एक निणर्य लेते हुए उन्हें अपने निर्णय से अवगत कर दिया 

    ''धरती के कुछ वैज्ञानिक और राजनेता टुंबाटी ग्रह जाकर आप लोगों की वैज्ञानिक प्रगति देखेंगे उन्हों ने सचमुच यदि आप लोगों को क्षेत्र में शक्तिशाली पाया तो फिर हम धरती पर आपके सामराज्य को सवीकार कर लेंगे '

    वे भी इस के लिए राजी हो गए 

 

 

समाप्त

 

पता:-

एम मुबीन

303-क्लासिक प्लाजा,तीन बत्ती

भिवंडी-421 302

जिठाणे  महारा8ट्र

मोबाईल:-09372436628

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बाल विज्ञान कथा संग्रह

स्टार वार

लेखक:-

एम मुबीन

 

पता:-

303,क्लासिक प्लाजा,तीन बती

भिवंडी-421302

जिठाणे महा

 

 

 

 

 

 

 

सूचि

1  शनि ग्रह के कैदी

2   अंतरिक्ष में खोए

3 सुपर कंप्यूटर का आतंक

4         संकट

5    सोने की नगरी

6     आत्मविश्वास

7   राजू का इन्साफ

8 टुंबाटी ग्रह के वासी

9  टुंबाटी ग्रह की सैर

10 टुंबाटी ग्रह पर खतरा